Home Loan का सच, EMI के अलावा भी बढ़ते हैं कई खर्च; यहां जानें सब कुछ 

 
Home Loan: Expenses Rise Beyond Just the EMI
Home Loan : घर खरीदने के लिए होम लोन लेना सिर्फ ब्याज दर तक सीमित नहीं होता। अक्सर लोग सिर्फ EMI पर ध्यान देते हैं और बाकी खर्चों को नजरअंदाज कर देते हैं। असल में, लोन लेने से पहले, दौरान और बाद में कई तरह के अतिरिक्त खर्च भी होते हैं। अगर आपको पहले से इनकी जानकारी हो, तो आप अनावश्यक खर्चों से बच सकते हैं और अपना बजट सही तरीके से बना सकते हैं। सभी खर्चों को समझकर आप अलग-अलग बैंकों और NBFCs के ऑफर्स की बेहतर तुलना भी कर सकते हैं।

जानें प्रोसेसिंग फीस

आपको बता दें कि लोन प्रोसेस करने के लिए बैंक या NBFC यह फीस लेते हैं। इसमें आपकी आय की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और प्रॉपर्टी का मूल्यांकन शामिल होता है। यह आमतौर पर लोन राशि का 0.25% से 1% तक होता है। कई बार यह फीस आवेदन के समय ही देनी पड़ती है और लोन मंजूर न होने पर वापस नहीं मिलती। इसलिए पहले रिफंड पॉलिसी जरूर जांच लें।

स्टाम्प ड्यूटी 

यह राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स है, जो प्रॉपर्टी लेनदेन को कानूनी मान्यता देता है। यह प्रॉपर्टी की कीमत या सरकारी तय न्यूनतम दर (रेडी रेकनर रेट) में से जो अधिक हो, उसके आधार पर तय होता है। स्टाम्प ड्यूटी आमतौर पर 3.5% से 9% तक हो सकती है। कुछ राज्यों में महिलाओं को इसमें छूट भी मिलती है। ध्यान रखें कि होम लोन में स्टाम्प ड्यूटी शामिल नहीं होती, इसे अलग से देना पड़ता है।

रजिस्ट्रेशन चार्ज 

यह शुल्क प्रॉपर्टी के स्वामित्व को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए लिया जाता है। आमतौर पर यह प्रॉपर्टी वैल्यू का करीब 1% होता है, हालांकि कुछ राज्यों में इसकी सीमा तय होती है। स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज मिलाकर आपकी प्रॉपर्टी की कुल लागत 4% से 10% तक बढ़ सकती है, इसलिए इसे पहले से बजट में शामिल करें।

अन्य जरूरी खर्च 

लीगल और टेक्निकल फीस: प्रॉपर्टी के कागजात और वैल्यूएशन की जांच के लिए
फ्रैंकिंग चार्ज: लोन एग्रीमेंट को स्टांप करने के लिए
MODT (टाइटल डीड जमा ज्ञापन): मॉर्गेज रजिस्ट्रेशन के लिए
प्रीपेमेंट चार्ज: लोन पहले चुकाने पर (फिक्स्ड रेट लोन में लागू)
लेट पेमेंट फीस: EMI मिस होने पर जुर्माना
GST: प्रोसेसिंग फीस और कुछ अन्य सेवाओं पर लागू
ब्याज दर का असर (Interest Rate Impact)

आपका कुल खर्च इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने फिक्स्ड या फ्लोटिंग ब्याज दर चुनी है:

फ्लोटिंग रेट: यह RBI की रेपो रेट से जुड़ा होता है। रेपो रेट बदलने पर EMI भी बदलती है। फरवरी 2026 में रेपो रेट 5.25% है। फ्लोटिंग रेट आमतौर पर कम से शुरू होते हैं और प्रीपेमेंट पर पेनल्टी नहीं होती।
फिक्स्ड रेट: इसमें EMI तय रहती है, जिससे भुगतान का अनुमान आसान होता है। लेकिन शुरुआती दरें ज्यादा होती हैं और दरें घटने पर आपको फायदा नहीं मिलता।