हरियाणा में कुम्हारों की चमकेगी किस्मत: माटी से बनेगा भविष्य, सैनी सरकार ने कर दिया बड़ा ऐलान
हरियाणा के कुम्हारों के दिन बहुरने वाले हैं! जो मिट्टी कभी उनके लिए बोझ बन गई थी, वही अब उनकी जिंदगी संवारेगी। हरियाणा माटी कला बोर्ड और खादी ग्रामोद्योग कार्यालय ने मिलकर एक बड़ी योजना तैयार की है, जिसके तहत कुम्हारों को न सिर्फ मिट्टी और पैसा मिलेगा, बल्कि उनका हुनर भी निखारा जाएगा। पुराने चॉक को अलविदा कहें, क्योंकि अब कुम्हार सोलर और इलेक्ट्रिक चॉक पर काम करेंगे। गुल्लक, दीये और मटके बनाने से आगे बढ़कर वे डिजाइनर बर्तन और सजावटी सामान बनाकर अपनी नई पहचान गढ़ेंगे।
गुजरात मॉडल से प्रेरणा
हरियाणा का माटी कला बोर्ड गुजरात मॉडल की तर्ज पर काम कर रहा है। गुजरात ने पिछले एक दशक में कुम्हारों को हाईटेक बनाकर मिट्टी के बर्तनों को फिर से चलन में ला दिया। उसी राह पर हरियाणा में हर गांव में कुम्हारों के लिए 5 एकड़ जमीन तय की जाएगी। अगर किसी गांव की मिट्टी बर्तन बनाने लायक नहीं होगी, तो उन्हें पास के गांव से जोड़ा जाएगा। साथ ही, सब्सिडी पर लोन और आधुनिक उपकरण भी दिए जाएंगे। झज्जर में बंद पड़ा प्रशिक्षण केंद्र भी दोबारा खुलेगा।
कुम्हारों की गिनती शुरू, पहले चरण में 700 से ज्यादा तैयार
बोर्ड ने जिलों में कुम्हारों की गिनती और मिट्टी की जांच शुरू कर दी है। पहले चरण में कुरुक्षेत्र, झज्जर, हिसार और कैथल के 700 से ज्यादा कुम्हारों की लिस्ट बनाई गई है, जिनमें से 76 ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर लिया है। सभी जिलों के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों (BDPO) से मिट्टी और कुम्हारों का ब्योरा मांगा गया है।
50 लाख तक लोन और सब्सिडी का तोहफा
- केंद्र सरकार की MSME स्कीम: हर कुम्हार को 15,000 रुपये की मुफ्त टूल किट, 2 लाख का लोन, और भुगतान के बाद 1 लाख और।
- हरियाणा खादी बोर्ड: 50 लाख तक का लोन, जिसमें 35% सब्सिडी (सामान्य वर्ग में 25%, महिलाओं और रिजर्व श्रेणी में 35%)।
क्या बदलेगा?
- हाईटेक कुम्हार: पुराने चॉक की जगह सोलर और इलेक्ट्रिक चॉक से काम।
- नया सामान: मिट्टी के डिजाइनर बर्तन, सजावटी सामान और पेंटिंग का जलवा।
- ट्रेनिंग: झज्जर में केंद्र खुलेगा, जहां इलेक्ट्रिक चॉक चलाना सिखाया जाएगा।
अधिकारी का बयान
“अब कुम्हार डिजाइनर बर्तन और सजावटी सामान बनाकर उस पर पेंटिंग कर सकेंगे। माटी कला टूल किट वितरण से उन्हें इलेक्ट्रिक चॉक चलाना सिखाया जाएगा। योजना का लाभ लेने के लिए माटी कला बोर्ड की साइट पर आवेदन करें।” – वीरेंद्र लाठर, IAS, सदस्य, माटी कला बोर्ड।
कुम्हारों के लिए नई सुबह
यह योजना न सिर्फ कुम्हारों को आर्थिक ताकत देगी, बल्कि हरियाणा की मिट्टी को भी नई पहचान दिलाएगी। क्या यह कदम कुम्हारों को मुख्यधारा में लाएगा? आप क्या सोचते हैं? नीचे कमेंट करें और इस खबर को शेयर करें, क्योंकि यह हर उस हाथ की कहानी है जो मिट्टी को सोने में बदल सकता है!
