Weather Report: उत्तर भारत के राज्यों में मौसम साफ और शुष्क, समय से पहले ही गर्मी की दस्तक
फरवरी के महीने में भी मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही रहा। इस दौरान पश्चिमी विक्षोभों की संख्या काफी कम रही और जो आए वे भी काफी कमजोर थे। यही कारण है कि न तो पहाड़ों पर भारी बर्फबारी देखी गई और न ही मैदानी इलाकों में कोई खास हलचल हुई, जिससे मौसम शांत बना रहा।
इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि फरवरी के दूसरे पखवाड़े से ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होने लगी और जो ठंड इस समय तक बनी रहनी चाहिए थी, वह अचानक गायब हो गई। वर्तमान में मैदानी इलाकों में शुष्क मौसम और तेज धूप के कारण दिन के तापमान में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है।
समय से पहले तापमान में इस असामान्य बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण रहे हैं:
पहला कारण यह है कि फरवरी में कोई भी बड़ा पश्चिमी विक्षोभ न आने के कारण पहाड़ों पर बर्फ की चादर नहीं बिछ सकी। बर्फबारी न होने की वजह से सर्द हवाओं का प्रभाव खत्म हो गया, जिससे फरवरी की ठंड समय से पहले ही गायब हो गई और तापमान बढ़ने लगा।
दूसरा कारण समय से पहले विकसित हुए 'एंटी-साइक्लोन' सिस्टम है। यह एक ऐसा सिस्टम है जो शुष्क मौसम की परिस्थितियों को बढ़ावा देता है जिससे अधिकतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर चला गया।
मौसम के मौजूदा मिजाज को देखते हुए यह अनुमान है कि आने वाले समय में भी यह एंटी-साइक्लोन सिस्टम स्थिर बना रहेगा। इसके प्रभाव से तापमान में वृद्धि का दौर जारी रहने की प्रबल संभावना है, जिससे फिलहाल गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद काफी कम नजर आ रही है। हालांकि, मार्च के दूसरे पखवाड़े में मौसम करवट ले सकता है।
संकेत मिल रहे हैं कि मार्च महीने के दूसरे पखवाड़े मौसमी सिस्टम आ सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी के साथ-साथ मैदानी भागों में आंधी, बारिश, ओलावृष्टि और गरज-चमक जैसी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
यह एक शुरुआती पूर्वानुमान है और समय नजदीक आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। मौसम में संभावित बदलावों की विस्तृत जानकारी विश्लेषण के बाद समय-समय पर साझा की जाएगी।
