14 से 16 मई के बीच पहुंचेगा मानसून; अल-नीनो का दिखेगा असर, जाने कब शुरू होगी बरसात ?

 
14 से 16 मई के बीच पहुंचेगा मानसून; अल-नीनो का दिखेगा असर, जाने कब शुरू होगी बरसात ?
Monsoon Report : मानसून को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। सभी लोगों के मन में ये सवाल मई महीने में देश का मौसम एक साथ राहत और चुनौती दोनों लेकर आ रहा है। किसी क्षेत्र में अधिक गर्मी तो कहीं अधिक बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम और उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से नीचे रह सकता है, जिससे भीषण गर्मी से काफी हद तक राहत मिलेगी।

मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वी भारत में वर्षा का स्वरूप असमान रह सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में अधिक बारिश और कुछ में कमी की स्थिति बन सकती है। अलनीनो का असर मानसूनी बारिश पर पड़ेगा, जिसके चलते सामान्य से कम बारिश की आशंका पहले ही जताई जा चुकी है। Monsoon Report

कब होगी मानसून की शुरुआत

मानसून की शुरुआत के संकेत भी साफ हैं। IMD के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में 14 से 16 मई के बीच पहुंच सकता है। यह सामान्य तिथि के आसपास है, जो मानसून के समय पर आगे बढ़ने की संभावना को मजबूत करता है। Monsoon Report

IMD के महानिदेशक ने शुक्रवार को प्रेस कान्फ्रेंस कर मई के तापमान, बारिश और मानसून की स्थिति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मई में पूरे देश में औसत वर्षा सामान्य से अधिक रह सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत और हिमालय की तराई वाले क्षेत्रों में शुरुआती पखवाड़े में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है।

कहां-कहां बढ़ेगा तापमान

मौसम विभाग के अनुसार, इससे जम्मू-कश्मीर से लेकर हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में तापमान पर नियंत्रण रहेगा एवं लू का असर सीमित हो सकता है। हालांकि महीने के अंतिम सप्ताह में तापमान बढ़ने के संकेत हैं, जो अस्थायी रूप से गर्मी को तेज कर सकते हैं। पूर्वानुमान में कहा गया है कि अलग-अलग इलाकों के तापमान में भी असमानता होगी। Monsoon Report

उत्तर एवं उत्तर-पश्चिम राज्यों में अधिकतम तापमान सामान्य या उससे कम रह सकता है, जबकि देश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है। ऐसे में रात में भी गर्मी बनी रह सकती है, जिससे लोगों को पूरी राहत नहीं मिलेगी। पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर के हिस्सों में हालात विपरीत रह सकते हैं। वहां वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है। Monsoon Report

मौसम विभाग के अनुसार, यह स्थिति कृषि और जल प्रबंधन के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हालांकि कुछ इलाकों में अचानक भारी बारिश की घटनाएं भी हो सकती हैं, जिससे बाढ़ जैसे हालात बनने का खतरा बना रहेगा।

IMD ने क्या कहा?

IMD का मानना है कि हिमालय की तराई वाले इलाके, पूर्व के तटीय राज्यों, गुजरात और महाराष्ट्र में लू के दिनों की संख्या सामान्य से ज्यादा रह सकती है। गुजरात, विशेषकर सौराष्ट्र क्षेत्र में तीन से चार दिन तीव्र हीटवेव की संभावना जताई गई है। Monsoon Report

मौसम विभाग के अनुसार, मौसम के इस मिश्रित असर के पीछे समुद्री कारकों की बड़ी भूमिका है। प्रशांत महासागर में अभी न्यूट्रल स्थिति है, जो धीरे-धीरे अलनीनो की ओर बढ़ रही है। इसके मानसून के दौरान विकसित होने की संभावना है। अल नीनो आमतौर पर भारत में वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करता है और मानसून को कमजोर करता है।