1000 रुपये के विवाद में युवक की हत्या मामले में पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंचे ग्रामीण, जांच अधिकारी बदलने की मांग

 
1000 रुपये के विवाद में युवक की हत्या मामले में पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंचे ग्रामीण, जांच अधिकारी बदलने की मांग

 

सिरसा। जिले के गांव छतरियां में महज 1000 रुपये के मामूली लेनदेन को लेकर हुई अशोक कुमार की हत्या के मामले में ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा है। पुलिस की लचर कार्यशैली से नाराज युवा और ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और जमकर नारेबाजी की। परिजनों ने मामले की जांच कर रहे अधिकारी को तुरंत बदलने और  आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग उठाई है।पत्रकारों से बातचीत करते हुए मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि घटना 12 जुलाई की है। अशोक अपने भाई मुकेश और चाचा के साथ खेत से पशुओं के लिए चारा लेकर घर लौट रहा था। रास्ते में पहले से घात लगाकर बैठे गांव के ही दबंग युवकों ने उनका रास्ता रोक लिया। हमले के दौरान मुकेश और उसके चाचा ने जैसे-तैसे भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन हमलावरों ने अशोक को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद लाठी-डंडों और लोहे के पाइपों से उस पर अंधाधुंध वार किए गए। हमले में गंभीर रूप से घायल अशोक को नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि हमलावरों ने अशोक को तड़पा-तड़पाकर मारा। उसके शरीर पर 15 से ज्यादा गहरे घाव और गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। ग्रामीणों ने बड़ागुढ़ा थाना पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का कहना है कि हत्या के इस मामले में कुल 17 लोग संलिप्त हैं, लेकिन पुलिस ने अब तक केवल 6 लोगों को ही पकड़ा है। बीते दिन एक और युवक की गिरफ्तारी की बात कही गई है, जिस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस मुख्य दोषियों को बचाने और मामले में निर्दोष लोगों को पकड़कर खानापूर्ति करने में लगी है। मामले में ढिलाई बरतने के कारण परिजन अब जांच अधिकारी को बदलने की मांग कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि बाकी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। इससे पूरे परिवार की जान को खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आने वाले समय में वे रोड जाम करने पर मजबूर होंगे। इस मौके पर मृतक के माता-पिता सहित हरबंस देहडू, जसवंत देहडू, बलराम देहडू, बलबीर देहडू, राम सिंह ढाका, बिट्टू गिरधर, राजेंद्र प्रसाद, बृजलाल देहड़ू, लहर सिंह देहड़ू, पवन देहड़ू, हवा सिंह पूनियां व काफी संख्या में ग्रामीण और युवा मौजूद थे।