गत एक सप्ताह से  हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) में नए चेयरमैन की नियुक्ति लंबित, किसी  मौजूदा सदस्य को भी नहीं दिया गया कार्यवाहक चेयरमैन का कार्यभार

 

हाल ही में स्वैछिक सेवानिवृत्त एच.सी.एस. अधिकारी  सतीश कुमार की चेयरमैन पद पर संभावित नियुक्ति का आधिकारिक ऐलान नहीं

गत छ: महीनों से एच.पी.एस.सी. में सदस्य का भी एक  पद रिक्त, अप्रैल माह  में राजेंद्र कुमार का  कार्यकाल पूरा होने के बाद से रिक्ति

चंडीगढ़,

हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) में गत एक सप्ताह से कोई चेयरमैन (अध्यक्ष) नहीं है. 22 अक्टूबर को आयोग के निवर्तमान चेयरमैन आलोक वर्मा का छ: वर्ष कार्यकाल समाप्त होने के उपरान्त न तो आज तक नए चेयरमैन की नियुक्ति की गयी है और न ही आयोग के मौजूदा चार सदस्यों में से किसी को आधिकारिक और ओपचारिक तौर पर कार्यवाहक चेयरमैन का कार्यभार नहीं दिया गया है.

एच.पी.एस.सी. के नये चेयरमैन पद पर नियुक्ति को लेकर चर्चाओं के बीच आयोग में गत साढ़े चार  वर्षों से अधिक समय तक डिप्टी सेक्रेटरी ( उप सचिव) के पद पर तैनात रहे 2011 बैच के एच.सी.एस. अधिकारी सतीश कुमार, जिन्होंने गत सप्ताह  स्वैछिक सेवानिवृत्ति ले ली  है, का नाम  संभावित चेयरमैन के तौर पर लिया जा रहा है हालांकि आज तक इस बारे में आधिकारिक ऐलान लंबित है.  

बहरहाल, यदि सतीश को  एच.पी.एस.सी. जैसी  संवैधानिक भर्ती संस्था का चेयरमैन नियुक्त किया जाता है, तो आयोग में अधिकारी के रूप में कार्य कर चुके किसी व्यक्ति के इस पद तक पहुंचने का पहला और  ऐतिहासिक उदाहरण सामने आएगा।

इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट एवं कानूनी-प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने इस घटनाक्रम के बीच एक महत्वपूर्ण सेवा-नियम संबंधी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि सतीश कुमार फरवरी, 2022 से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने तक एच.पी.एस.सी. में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर तैनात रहे, लेकिन इस पद का उल्लेख आयोग के ग्रुप-ए सेवा नियमों में नहीं मिलता। उनके अनुसार, HPSC (Group-A) Service Rules, 1997 और HPSC (Group-A) Service Rules,2024—दोनों में आयोग में  डिप्टी सेक्रेटरी के पद का उल्लेख तक नहीं है। उन्होंने गत वर्ष 23 दिसंबर 2025 में प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा  जारी हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) के कैडर निर्धारण आदेश में भी इस पद का उल्लेख नहीं होने की ओर ध्यान दिलाया। गत महीनों में उन्होंने कई बार इस  विसंगति बारे प्रदेश  सरकार और एच.पी.एस.सी. को भी लिखकर उनके संज्ञान में यह मामला लाया हालांकि आजतक कोई कार्रवाई नहीं हुई.

अधिकारी से सीधे चेयरमैन बने तो बनेगा नया रिकॉर्ड

हेमंत के अनुसार, हरियाणा में इससे पहले एच.पी.एस.सी. के सदस्य रह चुके व्यक्तियों को चेयरमैन नियुक्त किए जाने के उदाहरण रहे हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार के दौरान आयोग के पहले सदस्य के तौर पर नियुक्त हुए मनबीर भड़ाना बाद में चेयरमैन बने थे। इसी प्रकार, ओमप्रकाश चौटाला सरकार के समय आयोग में पहले  सदस्य नियुक्त  डॉ. एम.एस. सैनी भी बाद में चेयरमैन नियुक्त हुए थे।

ऐसे में यदि आयोग में डिप्टी सेक्रेटरी के रूप में कार्य कर चुके सतीश कुमार को चेयरमैन बनाया जाता है, तो यह पूर्व में सदस्य से चेयरमैन बने व्यक्तियों से अलग एक नया प्रशासनिक उदाहरण होगा। हालांकि, यह नियुक्ति होने की स्थिति पर आधारित संभावना है, न कि किसी घोषित सरकारी निर्णय पर।

नियमों में पद नहीं, फिर साढ़े चार साल तक कैसे हुई तैनाती?

हेमंत  ने सवाल उठाया कि यदि HPSC जैसी संवैधानिक संस्था में डिप्टी सेक्रेटरी जैसा महत्वपूर्ण पद मौजूद था और उस पर एक HCS अधिकारी साढ़े चार साल से अधिक समय तक कार्य करता रहा, तो उस पद का विधिक एवं प्रशासनिक आधार स्पष्ट होना चाहिए।

उनके मुताबिक, किसी पद का सेवा नियमों में उल्लेख न होना अपने आप में यह अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है कि पद अवैध था। हालांकि, ऐसी स्थिति में यह जांचना आवश्यक है कि पद स्वीकृत था या नहीं, उसे किस सक्षम प्राधिकारी ने सृजित अथवा स्वीकृत किया, उसकी भर्ती एवं तैनाती की शर्तें क्या थीं और क्या उसके संबंध में कोई अलग सरकारी अधिसूचना, कार्यालय आदेश या अन्य वैधानिक प्रावधान लागू था।

एच.पी.एस.सी. में में सचिव (सेक्रेटरी) का पद आई.ए.एस. (IAS) कैडर का स्वीकृत पद होता  है जिस पर वर्तमान में 2009 बैच के IAS अधिकारी पंकज तैनात हैं। ऐसे में डिप्टी सेक्रेटरी पद की स्वीकृति, कैडर स्थिति और प्रशासनिक अधिकारों से संबंधित अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक हो जाता है।

पहले भी उठा था डिप्टी सेक्रेटरी पद पर सवाल

एच.पी.एस.सी. में डिप्टी सेक्रेटरी पद को लेकर यह सवाल पहली बार नहीं उठा है। दिसंबर 2021 में डेंटल सर्जन भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मामले के दौरान तत्कालीन 2016 बैच के  एच.सी.एस. अधिकारी अनिल नागर, जिन्हें भ्रष्टाचार  के आरोपों के चलते प्रदेश सरकार द्वारा सेवा (नौकरी) से ही  बर्खास्त कर दिया  गया था, वह  भी आयोग में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर ही  तैनात थे। उस समय भी एच.पी.एस.सी. में डिप्टी सेक्रेटरी पद की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

हेमंत का कहना है कि डिप्टी सेक्रेटरी जैसे  संवेदनशील पद के संबंध में सरकार और आयोग को पद-सृजन, स्वीकृति, सेवा-नियमों तथा संबंधित नियुक्ति आदेशों की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक अस्पष्टता न रहे।

हेमंत ने बताया कि भारतीय  संविधान के अनुच्छेद 316(2) के अनुसार, राज्य लोक सेवा आयोग के चेयरमैन और सदस्य अपने पद ग्रहण करने की तारीख से छह वर्ष की अवधि या 62 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो पहले हो, पद पर रहते हैं।

चूँकि सतीश कुमार की जन्मतिथि 26 सितंबर 1970 है,  इस आधार पर, यदि उनकी एच.पी.एस.सी. चेयरमैन पद पर  नियुक्ति होती है तो उनका कार्यकाल  25 सितंबर 2032 तक होगा अर्थात जब वह 62 वर्ष की आयु के होंगे अर्थात उनका कार्यकाल अधिकतम छ: वर्ष के कार्यकाल से एक महीना कम होगा