घर की चुप्पी से बाहर आईं दर्द की कहानियां, हिसार के सुकून केंद्र में 1009 मामलों की काउंसलिंग

 
घर की चुप्पी से बाहर आईं दर्द की कहानियां, हिसार के सुकून केंद्र में 1009 मामलों की काउंसलिंग

अपराध व यौनिक हिंसा के 465 और घरेलू हिंसा के 450 मामले पहुंचे सुकून केंद्र 

पीड़ितों को काउंसलिंग के साथ चिकित्सा, पुलिस और कानूनी सहायता का मार्गदर्शन 

हिसार,

घर की चारदीवारी के पीछे सहा जा रहा उत्पीड़न हो या बच्चों के साथ होने वाली हिंसा, कई बार पीड़ित अपनी परेशानी किसी के सामने बयां नहीं कर पाते। डर, संकोच और पारिवारिक दबाव के बीच उनकी आवाज दबकर रह जाती है। ऐसे में जिला नागरिक अस्पताल हिसार का सुकून केंद्र पीड़ित महिलाओं और बच्चों को अपनी बात रखने, परिस्थितियों को समझने और उचित सहायता प्राप्त करने का सहारा दे रहा है। केंद्र में सितंबर 2026 तक कुल 1009 मामलों में काउंसलिंग के माध्यम से पीड़ितों को सहयोग और मार्गदर्शन दिया जा चुका है। इनमें बाल अपराध एवं यौनिक हिंसा तथा घरेलू हिंसा से जुड़े मामले सबसे अधिक हैं। अस्पताल के कमरा नंबर 24 में संचालित सुकून केंद्र नेशनल हेल्थ मिशन  के अंतर्गत हरियाणा स्टेट हेल्थ रिसर्च सेंटर की पहल पर चलाया जा रहा है। 

प्रधान चिकित्सा अधिकारी एवं केंद्र की नोडल अधिकारी डॉ. रीना जैन के मार्गदर्शन में जिला सुकून काउंसलर राहुल शर्मा पीड़ितों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनते हैं और उनकी परिस्थितियों के अनुसार जरूरी सहायता के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। 

जिला सुकून काउंसलर राहुल शर्मा ने बताया कि सितंबर 2026 तक केंद्र में दर्ज कुल 1009 मामलों में से 465 मामले बाल अपराध एवं यौनिक हिंसा से संबंधित हैं। यह कुल मामलों का 46.08 प्रतिशत है। वहीं, घरेलू हिंसा के 450 मामले सामने आए, जो कुल मामलों का 44.60 प्रतिशत हैं। इसके अलावा 94 मामले मानसिक उत्पीड़न से जुड़े हैं, जिनकी हिस्सेदारी 9.32 प्रतिशत है। केंद्र में आने वाले मामलों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। प्रत्येक मामले के पीछे अलग परिस्थिति और अलग चुनौती होती है। ऐसे में पीड़ित की बात सुनना, उसकी जरूरतों को समझना और उसे उपलब्ध सहायता सेवाओं से जोड़ना केंद्र के काम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में नशे की लत, आर्थिक तनाव, आपसी विवाद और परिवार के सदस्यों के बीच संवाद की कमी जैसी परिस्थितियां समस्या को गंभीर बना सकती हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे उचित परामर्श और सहायता उपलब्ध करवाना जरूरी है।बच्चों से संबंधित मामलों में ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी, सोशल मीडिया का असुरक्षित इस्तेमाल और अभिभावकों के साथ पर्याप्त संवाद न होना भी चिंता का विषय है। बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, डर या असहजता दिखाई देने पर अभिभावकों को उनकी बात ध्यान से सुननी चाहिए। बच्चों को ऐसा सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है, जहां वे बिना किसी डर के अपनी परेशानी साझा कर सकें।

उन्होंने बताया कि सुकून केंद्र में पीड़ितों को काउंसलिंग के साथ उनकी जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करने, पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने की प्रक्रिया समझने और निःशुल्क कानूनी सहायता से जुड़ने के संबंध में मार्गदर्शन दिया जाता है। केंद्र का उद्देश्य पीड़ितों को ऐसा संवेदनशील वातावरण उपलब्ध करवाना है, जहां वे बिना झिझक अपनी समस्या बता सकें और अपने लिए उपलब्ध विकल्पों की जानकारी हासिल कर सकें।केंद्र में पीड़ित की परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए आगे की सहायता के लिए मार्गदर्शन देने का प्रयास किया जाता है, ताकि मुश्किल समय में उसे अकेले परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। 

महिला आयोग की वाइस चेयरपर्सन और न्यायिक अधिकारी भी कर चुके दौरा :

राहुल शर्मा ने बताया कि जुलाई 2026 में हरियाणा राज्य महिला आयोग की वाइस चेयरपर्सन मीना परमार ने अपनी टीम के साथ सुकून केंद्र का दौरा किया था। इसी माह जिला एवं सत्र न्यायालय से संबंधित एडीजे स्तर के न्यायिक अधिकारी ने भी केंद्र की व्यवस्थाओं और सेवाओं का जायजा लिया। इस दौरान केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं और पीड़ितों को प्रदान की जा रही सहायता के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई।

राहुल शर्मा ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा केवल पुलिस, अस्पताल या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे समाज को संवेदनशीलता के साथ अपनी भूमिका निभानी होगी। परिवार में आपसी विश्वास, महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार और बच्चों के साथ नियमित संवाद से कई समस्याओं को समय रहते समझने में मदद मिल सकती है।उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे रोजाना बच्चों से बातचीत करें, उनकी भावनाओं और समस्याओं को समझें तथा उन्हें खुलकर अपनी बात रखने का अवसर दें। घरेलू हिंसा या मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रहे लोगों की परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें उचित सहायता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करें।