प्रदेश कांग्रेस कमेटी के डेलीगेट रतन लाल गेदर एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता तेजभान पटवारी ने कहा कि सिरसा के कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया द्वारा सिरसा की सांसद कुमारी शैलजा को लेकर की गई टिप्पणी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। कुमारी शैलजा कई पीढ़ियों से कांग्रेस परिवार का हिस्सा हैं और उनके कतरे-कतरे में कांग्रेस की विचारधारा बसी हुई है। ऐसे वरिष्ठ नेता के प्रति किसी भी प्रकार की अमर्यादित टिप्पणी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए स्वीकार्य नहीं है। जारी बयान में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में गोकुल सेतिया द्वारा कुमारी शैलजा का विरोध किया गया था और इनैलो उम्मीदवार का समर्थन किया गया था।
इसके बावजूद कुमारी शैलजा ने सिरसा विधानसभा क्षेत्र से करीब 12,500 वोटों की बढ़त हासिल की। वहीं, कांग्रेस में शामिल होने के बाद वर्ष 2024 में पार्टी ने गोकुल सेतिया को विधानसभा चुनाव में टिकट दिया और कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर मेहनत की, जिसके परिणामस्वरूप वह विधायक बने। रतनलाल गेदर व तेजभान पटवारी ने कहा कि विधायक बनने के बाद गोकुल सेतिया कांग्रेस की नीतियों और परंपराओं के अनुरूप स्वयं को ढालने के बजाय लगातार पार्टी की स्थापित परंपराओं के विपरीत काम कर रहे हैं।
नगर परिषद चेयरमैन चुनाव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इस दौरान भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को साथ नहीं लिया गया और न ही उचित सलाह-मशविरा किया गया। इसके बावजूद उनके द्वारा खड़ा किया गया उम्मीदवार चुनाव में बुरी तरह हार गया। उन्होंने कहा कि जिन पंजाबी वोटों को लेकर विधायक गुमान करते हैं, उन्हीं पंजाबी बहुल वार्डों में भी उनके समर्थित उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि बीरेन्द्र सिंह को पर्यवेक्षक बनाए जाने में कुमारी शैलजा की कोई भूमिका नहीं है। पर्यवेक्षक नियुक्त करना पार्टी की संगठनात्मक प्रक्रिया और परंपरा का हिस्सा है। इसलिए इस मामले में कुमारी शैलजा को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह अनुचित है। कांग्रेस नेताओं ने गोकुल सेतिया को नसीहत देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें विधायक बनाया है, इसलिए उन्हें पार्टी की नीतियों, विचारधारा और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
वरिष्ठ नेताओं के प्रति मर्यादा और अनुशासन बनाए रखना प्रत्येक कांग्रेस कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की बदजुबानी और वरिष्ठ नेताओं के प्रति अमर्यादित टिप्पणियां किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। विधायक को अपनी भाषा पर संयम रखते हुए पार्टी अनुशासन और मर्यादा में रहकर काम करना चाहिए।
