श्री नंदी गौशाला में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, पूर्व राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल ने सुनी कथा

 
श्री नंदी गौशाला में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, पूर्व राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल ने सुनी कथा

सिरसा । गांव रंगड़ी खेड़ा स्थित श्री नंदी गौशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल प्रो. गणेशी लाल ने पहुंचकर कथा का श्रवण किया। उनके साथ उनके पुत्र हारे का सहारा चेरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान मनीष सिंगला व पौत्र लक्ष्य सिंगला भी मौजूद थे। पिता पुत्र के पहुंचने पर आयोजकों ने उनका भव्य स्वागत किया। प्रो गणेशी लाल ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का अमूल्य ग्रंथ है, जो मनुष्य को भक्ति के साथ-साथ जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करता है। आज के समय में ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों की विशेष आवश्यकता है। इन आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना बढ़ती है और नई पीढ़ी अपनी जड़ों, संस्कारों और संस्कृति से जुड़ती है।

उन्होंने श्री नंदी गौशाला में आयोजित इस कथा के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि कथा का संदेश जन-जन तक पहुंचना चाहिए। मनीष सिंगला ने कहा कि श्री नंदी गौशाला में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन सभी क्षेत्रवासियों के लिए आस्था और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा हमें केवल भगवान की भक्ति नहीं सिखाती, बल्कि माता-पिता का सम्मान, संस्कार, सेवा और मानवता का संदेश भी देती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों को लगातार बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कथा में राधा-कृष्ण और शिव-पार्वती विवाह की झांकी ने सभी का दिल जीत लिया। इसके साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का विहंगम दृश्य प्रस्तुत किया गया। राधा-कृष्ण की भक्ति और मीरा के समर्पण ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। वहीं शिव-पार्वती विवाह की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजनों और संगीतमयी प्रस्तुतियों पर भाव-विभोर नजर आए।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया और धार्मिक आयोजन का आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। इस दौरान मनीष सिंगला ने विभिन्न भजन भी प्रस्तुत किए और सभी मंत्रमुग्ध हुए। इस मौके पर निजी सचिव हरपिंदर शर्मा, योगेश बिजारनिया, प्रधान भजन लाल कंबोज, विजय कुमार, ओम प्रकाश सैनी, सरपंच अंग्रेज सिंह, जगजीत सिंह, पूर्व सरपंच गुरमेल सिंह, बनवारी लाल, बलबीर गढ़वाल, रोहताश सहारण, महावीर नेहरा, चतर्भुज, जगीर सिंह, लीलाधर सैनी, अमरनाथ, हरीश कुमार, संजीव मिढ़ा, अशोक नेहरा, बंदु कंबोज, पूर्ण सुथार इत्यादि मौजूद थे।