एसबी मॉडल स्कूल, भिवानी रोड, रोहतक में राज्य स्तरीय परियोजना के तहत आयोजित हुआ सेमिनार
मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी एवं राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने विद्यार्थियों व शिक्षकों को किया संबोधित
रोहतक, 13 अक्तूबर।
हरियाणा राज्य बाल परिषद की राज्य स्तरीय परियोजना बाल सलाह परामर्श एवं कल्याण केंद्र के तहत मंगलवार को भिवानी रोड स्थित एसबी मॉडल स्कूल में ‘मन में छिपे हुए डर को जानने, उसका सामना करने, चुनौती देने और सकारात्मक परिणाम हासिल करने’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया।
सेमिनार में मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक एवं राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने किशोरावस्था के विद्यार्थियों एवं उनके शिक्षकों को संबोधित करते हुए जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए मन में छिपे डर को पहचानने और उसका सामना करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
अनिल मलिक ने कहा कि अक्सर कुछ लोगों के मन में डर इस कदर बैठ जाता है कि वे आम और व्यावहारिक विषयों पर भी खुलकर बात नहीं कर पाते। असफलता का डर, लोग क्या कहेंगे की चिंता, अकेले रह जाने का भय या बदलाव का डर व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकता है। इन आशंकाओं को समाप्त करने की शुरुआत उन्हें स्वीकार करने से होती है। इसके बाद उनका सामना करके और उन्हें चुनौती देकर ही सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि डर एक ऐसी भावना है, जो व्यक्ति के विकास को रोकने के साथ-साथ उसकी संभावनाओं को भी सीमित कर देती है। मन में छिपे डर मुख्य रूप से व्यक्ति की विचार प्रक्रिया से जुड़े होते हैं। इसके साथ ही मस्तिष्क का सुरक्षा तंत्र, जीवन के अनुभव, सोशल मीडिया का नासमझी में किया गया दुरुपयोग, मित्रों का समूह और सामाजिक वातावरण भी व्यक्ति के डर को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अनिल मलिक ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें अपने डर को पहचानकर उसका सामना करना चाहिए तथा निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। इसके लिए निर्णय लेने की स्वतंत्रता वाला सकारात्मक माहौल जरूरी है, जहां विद्यार्थी बिना किसी झिझक के अपनी समस्याओं और मन की बात साझा कर सकें। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढ़ने में मदद करती है। सेमिनार का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक रूप से सशक्त बनाना, उनके भीतर आत्मविश्वास विकसित करना तथा उन्हें अपनी समस्याओं को समझने और उनका सकारात्मक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना रहा।
