हरियाणा में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य निगरानी को मजबूत करने के लिए शुरू की  'समृद्धि' पहल

 

 

चंडीगढ़ , 5 अक्टूबर - हरियाणा में मातृ मृत्यु दर और नवजात मृत्यु दर में बड़ी गिरावट लाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने आज राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ,हरियाणा द्वारा प्रस्तावित 'समृद्धि' (SAMRIDDHI - Safe Motherhood and Child Health Initiative) योजना का शुभारंभ किया।

 

आरती सिंह राव ने बताया कि यह एक तकनीक-संचालित प्रणाली है जो राज्य में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की निरंतर ट्रैकिंग करेगी, जिसमें विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस पहल के तहत गर्भवती महिला के प्रसवपूर्व पंजीकरण से लेकर प्रसव और जन्म के 42 दिनों तक नवजात शिशु की देखभाल की एंड-टू-एंड निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।

 

'समृद्धि' तंत्र के सुचारू संचालन के लिए एनएचएम, हरियाणा मुख्यालय में एक समृद्धि पोर्टल, स्टेट कमान सेंटर और समर्पित 102 कॉल सेंटर के साथ-साथ प्रत्येक जिला अस्पताल में एक जिला कॉल सेंटर स्थापित किया जा रहा है। समृद्धि पोर्टल पर हर गर्भवती महिला का पंजीकरण अनिवार्य होगा, जिससे एक यूनिक समृद्धि आईडी जनरेट होगी। यह पोर्टल सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में मिलने वाली सेवाओं की लॉन्गिट्यूडनल ट्रैकिंग में मदद करेगा। इसके साथ ही, ऑटोमेटेड अलर्ट और ड्यू लिस्ट के ज़रिए एएनएम और चिकित्सा अधिकारियों को समय पर प्रसवपूर्व देखभाल, फॉलो-अप और प्रसव की पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

 

उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के तहत स्टेट कमान सेंटर सेवा वितरण, छूटी हुई प्रसवपूर्व जांचों (ANC), रेफरल और उच्च जोखिम वाले मामलों की रीयल-टाइम निगरानी करेगा। वहीं, 102 कॉल सेंटर गर्भवती महिलाओं, विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली माताओं को परामर्श देगा और प्रसव के अंतिम हफ्तों में उनसे सघन संपर्क बनाए रखेगा। इसके अलावा, पहचान की गई प्रत्येक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला को गर्भावस्था के 10वें से 12वें सप्ताह में उचित नैदानिक मूल्यांकन और प्रबंधन के लिए पीएमएसएमए  शिविर में भेजा जाएगा।

 

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गंभीर परिस्थितियों में समय बचाने के लिए प्रत्येक महिला को उसकी जोखिम श्रेणी के अनुसार उपयुक्त स्वास्थ्य सुविधा केंद्र से टैग किया जाएगा, जिसमें लाभार्थी के अनुरोध पर निजी स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल हो सकते हैं। इससे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से होने वाले अनावश्यक बहुस्तरीय रेफरल रुकेंगे और आपात स्थिति में सही स्तर की देखभाल तुरंत मिल सकेगी। यह योजना उच्च जोखिम वाली माताओं से जन्मे शिशुओं, एसएनसीयू से डिस्चार्ज हुए बच्चों और अन्य संवेदनशील नवजात शिशुओं की सक्रिय ट्रैकिंग भी सुनिश्चित करेगी, जिसमें स्तनपान, खतरे के लक्षण, टीकाकरण और नवजात अवधि के दौरान उनके शारीरिक विकास की निगरानी शामिल है।

 

उन्होंने आगे बताया कि 'समृद्धि' के सफल कार्यान्वयन के लिए एनएचएम हरियाणा, स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशालय, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, महिला एवं बाल विकास विभाग, नागरिक पंजीकरण प्रणाली, निजी स्वास्थ्य सुविधाओं और मेडिकल कॉलेजों के बीच एकीकृत समन्वय स्थापित किया जाएगा।

 

स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने विश्वास जताया कि यह पहल शत-प्रतिशत गर्भावस्था पंजीकरण, उच्च जोखिम वाले मामलों की त्वरित पहचान और समय पर रेफरल सुनिश्चित करके रोकने योग्य मातृ व नवजात मौतों को समाप्त करेगी और हरियाणा के स्वास्थ्य मानकों में क्रांतिकारी सुधार लाएगी।