दो एकड़ से कम भूमि पर पराली जलाने पर 5 हजार, दो से पांच एकड़ पर 10 हजार तथा पांच एकड़ से अधिक पर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना
कहा, उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
पराली जलाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, पोर्टल पर रेड एंट्री करने और ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश
रोहतक, 21 अक्टूबर।
जिला में फसल अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। स्थानीय जिला विकास भवन में एसडीएम आशीष कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संबंधित अधिकारियों और ग्राम सचिवों को पराली जलाने की घटनाओं को रोकने तथा किसानों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि पराली जलाने की किसी भी घटना को गंभीरता से लिया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में एसडीएम आशीष कुमार ने निर्देश दिए कि अधिकारी केवल हरसैक से प्राप्त एक्टिव फायर लोकेशन (एएफएल) डेटा पर निर्भर न रहें, बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से निगरानी करें। फील्ड कर्मचारियों को भी सक्रिय रहकर पराली जलाने की संभावित घटनाओं पर नजर रखने और समय रहते आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। एसडीएम आशीष कुमार ने कहा कि निर्धारित प्रावधानों के अनुसार दो एकड़ से कम भूमि पर पराली जलाने पर पांच हजार रुपये, दो से पांच एकड़ तक की भूमि पर 10 हजार रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक भूमि पर पराली जलाने पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, संबंधित विभागों के माध्यम से नियमों के तहत दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की कार्रवाई भी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने के मामलों में संबंधित किसानों के रिकॉर्ड में ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर रेड एंट्री दर्ज करने का भी प्रावधान है। इसके परिणामस्वरूप संबंधित किसान आगामी दो सीजन तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल बेचने तथा नियमानुसार अन्य सरकारी योजनाओं और राजस्व सेवाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं। एसडीएम आशीष कुमार ने ग्राम सचिवों को निर्देश दिए कि प्रत्येक गांव में ग्राम सभाओं और जागरूकता बैठकों का आयोजन किया जाए। इन बैठकों में सरपंचों, पंचायत प्रतिनिधियों, नंबरदारों, चौकीदारों, प्रबुद्ध ग्रामीणों और किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। किसानों को पराली न जलाने के नुकसान तथा फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के विकल्पों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाए।
आशीष कुमार ने कहा कि किसानों के साथ संवाद करते समय उन्हें समझाया जाए कि पराली जलाने से होने वाला वायु प्रदूषण आमजन के स्वास्थ्य के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है। ग्राम स्तर पर आयोजित बैठकों की प्रमाणिकता और निगरानी के लिए फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करवाने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में कुछ ग्राम सचिवों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताते हुए एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों को गैर-हाजिर ग्राम सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी अपने क्षेत्र में पराली प्रबंधन अभियान को गंभीरता से लें तथा किसानों के बीच निरंतर जागरूकता बनाए रखें।
एसडीएम आशीष कुमार ने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों, फंगस और केंचुओं को नुकसान पहुंचता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। इसके अलावा, पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को आग लगाने के बजाय उचित प्रबंधन के विकल्प अपनाएं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा, उपजाऊ भूमि और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए पराली प्रबंधन में प्रशासन के साथ सहयोग करना जरूरी है। जिला प्रशासन का उद्देश्य किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।
