मेडिकल सीटों के आवंटन पर उठे सवाल, एडवोकेट बागड़ी बोले- मजदूरों के बच्चों के साथ अन्याय

 
मेडिकल सीटों के आवंटन पर उठे सवाल, एडवोकेट बागड़ी बोले- मजदूरों के बच्चों के साथ अन्याय

 हिसार। इनेलो के वरिष्ठ नेता एवं हिसार विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी रहे एडवोकेट प्रमोद बागड़ी ने वीरवार को एक बयान जारी कर ईएसआईसी के बीमित कर्मचारियों के बच्चों और आश्रितों के लिए निर्धारित एमबीबीएस सीटों को खुले वर्ग में शामिल किए जाने पर  रोष जताया है। उन्होंने इसे देशभर के मजदूरों और उनके बच्चों के साथ अन्याय बताते हुए मांग की कि पात्र बच्चों को पहले बीमित व्यक्ति-आश्रित कोटे के तहत प्रवेश का अवसर दिया जाए।

एडवोकेट बागड़ी ने कहा कि बीमित कर्मचारी के बच्चों के लिए विशेष प्रवेश व्यवस्था का उद्देश्य उन्हें चिकित्सा शिक्षा में अवसर उपलब्ध कराना है, लेकिन परामर्श प्रक्रिया में इन सीटों को खुले सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा अन्य खुले वर्गों में दिखाया गया है। इससे उन मजदूरों के बच्चों का अधिकार प्रभावित हुआ है, जिनके लिए यह व्यवस्था की गई थी।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली चिकित्सा प्रवेश परामर्श प्रक्रिया से जुड़ा है। हरियाणा में भी प्रथम चरण की चिकित्सा प्रवेश प्रक्रिया में ईएसआईसी बीमित कर्मचारियों के बच्चों और आश्रितों के लिए स्पष्ट कोटा उपलब्ध नहीं कराया गया।

उन्होंने बताया कि नगर निगम के कच्चे कर्मचारी विनोद कुमार पिछले करीब आठ वर्षों से नगर निगम हिसार में कूड़ा उठाने वाली गाड़ी चलाते हैं। उनका ईएसआईसी कार्ड बना हुआ है। पत्नी के निधन के बाद वह तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनकी बेटी साक्षी के नाम पर बीमित कर्मचारी के आश्रित होने का वैध प्रमाण-पत्र भी बना हुआ है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब मजदूर ईएसआईसी में नियमित योगदान करता है और उसके बच्चे के पास आश्रित होने का वैध प्रमाण है, तो उसे विशेष कोटे का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि मजदूर दिन-रात मेहनत कर शहर की व्यवस्था संभालता है, लेकिन जब उसके बच्चे के डॉक्टर बनने का अवसर आता है तो उसे खुले वर्ग की कठिन प्रतिस्पर्धा में डाल दिया जाता है।

एडवोकेट प्रमोद बागड़ी ने सरकार और प्रवेश परामर्श अधिकारियों से पूछा कि ईएसआईसी के बीमित कर्मचारियों के बच्चों के लिए निर्धारित सीटें खुले वर्ग में क्यों डाली गईं और पात्र बच्चों को पहले उनके निर्धारित कोटे में अवसर क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने पूरी सीट सूची और प्रवेश प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की भी मांग की।

उन्होंने मांग की कि प्रथम चरण की राष्ट्रीय तथा हरियाणा की चिकित्सा प्रवेश प्रक्रिया में ईएसआईसी बीमित कर्मचारी-आश्रित कोटे से संबंधित सीटों और प्रवेश को तत्काल रोककर पात्र अभ्यर्थियों को पहले अवसर दिया जाए। साथ ही, यदि नियमों के विपरीत सीटों को खुले वर्ग में डाला गया है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल साक्षी की नहीं, बल्कि देशभर के उन मजदूरों के बच्चों की है जो ईएसआईसी में योगदान के आधार पर अपने अधिकार की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने कहा कि मजदूर के योगदान का लाभ उसके बच्चे को मिलना चाहिए और उसके अधिकार को खुले वर्ग के नाम पर नहीं छीना जाना चाहिए।