पीएम-कुसुम योजना से किसान यशवीर की खेती की लागत हुई कम

 

सोलर पंप से सिंचाई हुई किफायती, डीजल के खर्च से मिली बड़ी राहत
सिरसा, 08 अक्टूबर।
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना किसानों के लिए सिंचाई की लागत कम करने और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। योजना के तहत किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, जिससे उन्हें डीजल और बिजली पर होने वाले खर्च से राहत मिल रही है। सिरसा के गांव लुदेसर के किसान यशवीर गाट के लिए भी यह योजना खेती को अधिक किफायती बनाने का माध्यम बनी है। 43 वर्षीय यशवीर गाट बीए और जेबीटी पास हैं तथा उनके पास पांच एकड़ जमीन है। वर्ष 2023 में उनके खेत में 10 एचपी की सोलर मोटर लगाई गई। इससे पहले वह खेतों की सिंचाई के लिए डीजल इंजन और जनरेटर पर निर्भर थे। सौर ऊर्जा आधारित पंप लगने के बाद उनके लिए सिंचाई का तरीका आसान होने के साथ-साथ खर्च भी काफी कम हुआ है।
डीजल खर्च से मिली राहत, सौर ऊर्जा ने बदली सिंचाई की तस्वीर
यशवीर गाट बताते हैं कि सोलर कनेक्शन मिलने से पहले खेतों की सिंचाई के लिए डीजल इंजन और जनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ता था। एक घंटे में करीब 10 लीटर डीजल खर्च हो जाता था। इसके अलावा डीजल इंजन की सर्विस और रख-रखाव पर होने वाला खर्च अलग था। उन्होंने बताया कि हर बार सिंचाई से पहले डीजल की व्यवस्था करने और जनरेटर के रख-रखाव को लेकर चिंता रहती थी। वर्ष 2023 में खेत में 10 एचपी की सोलर मोटर लगने के बाद यशवीर गाट की सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया। अब वह सौर ऊर्जा की मदद से एक दिन में करीब दो एकड़ जमीन की सिंचाई कर लेते हैं। उन्हें डीजल खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और जनरेटर चलाने से जुड़े खर्च से भी राहत मिली है।
जरूरत के अनुसार सिंचाई करना भी आसान
यशवीर गाट के अनुसार, पहले सिंचाई खेती की लागत बढ़ाने वाला एक बड़ा खर्च था, लेकिन सोलर पंप लगने के बाद यह खर्च काफी कम हो गया है। दिन के समय सौर ऊर्जा उपलब्ध होने से खेत की जरूरत के अनुसार सिंचाई करना भी आसान हुआ है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सरकार की यह योजना लाभदायक बन रही है और खेती के खर्चों को कम करने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी लाभ पहुंचा रही है। सोलर पंप का रखरखाव का खर्च नहीं है। यह लंबी अवधि की बचत का हिस्सा है।
- योजना ने किसानों के किए ठाठ, 35500 किसानों को हुआ लाभ
यह अकेले लुदेसर के किसान की कहानी नहीं है बल्कि जिले में 35,500 ऐसे किसान है जिन्होंने इस योजना के तहत 2019 से लेकर अबतक लाभ लिया है। किसानों के ठाठ करने वाली यह योजना वर्ष 2019 में शुरू की गई थी और लगातार किसान योजना से जुड़ रहे हैं।