दीपावली के पर्व पर आमजन पर्यावरण संरक्षण करने में अपना योगदान दें: डीसी साहिल गुप्ता

 
 दीपावली के पर्व पर आमजन पर्यावरण संरक्षण करने में अपना योगदान दें: डीसी साहिल गुप्ता

डीसी साहिल गुप्ता ने जिलेवासियों को दी धनतेरस, दीपावली व विश्वकर्मा-डे के पावन पवित्र पर्व की शुभकामनाएं

युवाओं से की निर्धारित समयानुसार ही ग्रीन पटाखे या आतिशबाजी चलाने की अपील

भिवानी, 05 नवंबर।

डीसी साहिल गुप्ता ने जिले वासियों को धनतेरस, दीपावली व विश्वकर्मा-डे के पावन पवित्र पर्व की शुभकामनाएं दी हैं। डीसी ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि वे दीपावली के पर्व पर पर्यावरण संरक्षण करने में अपना योगदान दें। डीसी ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार निर्धारित समयानुसार ही केवल ग्रीन पटाखे या आतिशबाजी ही चलाने की अपील की है।
उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर विशेष आदेश जारी किए गए हैं। जिलाधीश साहिल गुप्ता द्वारा इस बारे में आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। पटाखों की बिक्री 4 से 6 नवंबर तक निर्धारित स्थानों पर ही की जा सकेगी। ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल 7 और 8 नवंबर को प्रात:कालीन में सुबह 6:00 बजे से लेकर 7:00 बजे तक और सायं कालीन रात्रि 8:00 बजे से लेकर 10:00 बजे तक ही बजा सकते हैं। सात व आठ नवंबर को दोनों दिन पटाखों की बिक्री नहीं होगी। 9 नवंबर से जिले में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर से लागू हो जाएगा। डीसी ने विशेषकर युवाओं से अपील करते हुए कहा है कि वे निर्धारित समयानुसार ही ग्रीन पटाखे चलाएं। डीसी ने कहा कि धुंआ होने से जहां एक तरफ पर्यावरण प्रदूषित होता है, वहीं दूसरी ओर बुजुर्ग, बीमार लोगों व छोटे बच्चों को भारी परेशानी होती है। यहां तक कि आमजन को भी सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। ऐसे में पर्यावरण का संरक्षण करना हमारी नैतिक  जिम्मेदारी बन जाती है।

अभिभावकों से बच्चों को समझाने की अपील

डीसी ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा है कि वे अपने बच्चों को समझाएं कि पटाखों से पर्यावरण प्रदूषित होता है। प्रदूषण हम सभी के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों के समझाने से बच्चों के मनोपटल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बच्चों को सावधानीपूर्वक पटाखे या आतिशबाजी चलाने को कहें।
चिकित्सकों को बुजुर्गों व बीमार लोगों को बाहर न घूमने की सलाह वहीं दूसरी ओर चिकित्सकों ने बीमार लोगों व बुजुर्गों को सलाह दी है कि वे पटाखे चलाने की समयावधि के दौरान घर से बाहर खुले में ना घूमें। खुले में घूमने से धुंए का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अस्थमा से ग्रस्त लोगों को दिक्कत और भी अधिक बढ़ जाती है।


दीपावली पर क्या करें और क्या न करें

क्या करें -

दीपावली पर मिट्टी के दीयों का अधिक से अधिक प्रयोग करें और सुरक्षित तरीके से दीप प्रज्वलित करें।

पटाखे खरीदते समय उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा संबंधी जानकारी आवश्यक जांचें।

केवल प्रशासन द्वारा अनुमत ग्रीन पटाखों का ही प्रयोग करें।

पटाखे खुले स्थान पर तथा निर्धारित समय के दौरान ही जलाएं।

पटाखे जलाते समय पानी और रेत से भरी बाल्टी पास रखें।

बच्चों को पटाखे चलाते समय अकेला न छोड़ें और उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखें।

घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था रखें।

बिजली की झालरों और सजावटी लाइटों के लिए सुरक्षित वायरिंग का प्रयोग करें।

दीपावली पर बाजारों में खरीदारी करते समय यातायात नियमों का पालन करें और निर्धारित स्थानों पर ही वाहन पार्क करें।

त्योहार के दौरान स्वच्छता बनाए रखें तथा पटाखों का कचरा निर्धारित स्थान पर डालें।

पर्यावरण संरक्षण के लिए कम ध्वनि और कम प्रदूषण वाले विकल्प अपनाएं।

क्या न करें -

प्रतिबंधित एवं निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि और प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों का प्रयोग न करें।

भीड़भाड़ वाले बाजारों, गलियों, घरों के अंदर और बंद स्थानों पर पटाखे न जलाएं।

पटाखे जलाते समय उन्हें हाथ में पकडक़र न रखें और न ही किसी व्यक्ति या वाहन की ओर फेंकें।

पटाखे जलाने के लिए माचिस या लाइटर का प्रयोग करते समय लापरवाही न बरतें।

जलते हुए पटाखों के पास ज्वलनशील पदार्थ, पेट्रोल, डीजल या गैस सिलेंडर न रखें।

अधजले या खराब पटाखों को दोबारा जलाने का प्रयास न करें।

पटाखों को जेब में न रखें और न ही बच्चों की पहुंच में छोड़ें।

अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों एवं अन्य शांत क्षेत्रों के आसपास पटाखे न चलाएं।

सडक़ पर पटाखे जलाकर यातायात बाधित न करें।

त्योहार के उत्साह में तेज आवाज वाले डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों का अनावश्यक प्रयोग न करें

बिजली के ओवरलोड कनेक्शन और असुरक्षित तारों का इस्तेमाल न करें।

आपात स्थिति में घबराएं नहीं और तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें