श्री विष्णु क्लब रामलीला में चौथे दिन प्रभु श्रीराम के हाथों हुआ शिवधनुष भंग, माता सीता ने डाली वरमाला, क्रोधित परशुराम के आगमन से गरमाया मंच

 
श्री विष्णु क्लब रामलीला में चौथे दिन प्रभु श्रीराम के हाथों हुआ शिवधनुष भंग, माता सीता ने डाली वरमाला, क्रोधित परशुराम के आगमन से गरमाया मंच

सिरसा

 सूरतगढ़िया चौक स्थित श्री विष्णु क्लब के प्रांगण में इन दिनों आयोजित हो रही पारंपरिक श्री रामलीला का मंचन अपने चरम पर पहुंच गया है। रामलीला के चौथे दिन कलाकारों ने रामायण के सबसे रोमांचक, प्रेरणादायी और ऐतिहासिक प्रसंग—'जनकपुर दरबार, धनुष यज्ञ, सीता-स्वयंवर और परशुराम-लक्ष्मण संवाद' का ऐसा सजीव मंचन किया कि पूरा पंडाल भक्ति और उत्साह के सागर में डूब गया। इस मौक़े पर कपिल सरावगी , जोनी सोनी ने विशेष रूप से शिरकत की। श्री विष्णु क्लब के प्रधान दीपक सेठी ने बताया कि कलाकारों के शानदार अभिनय और भव्य मंच सज्जा ने उपस्थित दर्शकों को त्रेतायुग के उस स्वर्ण काल में पहुंचा दिया। राजा जनक के दरबार में आयोजित वह दृश्य रहा, जहां देश-विदेश के पराक्रमी राजाओं के अहंकार का शमन हुआ। अहंकारी और बलशाली राजा जब भगवान शिव के विशाल पिनाक (धनुष) को हिलाने तक में असमर्थ रहे, तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने सहजता से आगे कदम बढ़ाया। जैसे ही प्रभु श्रीराम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई, वह कड़कती हुई आवाज़ के साथ दो टुकड़ों में विभाजित हो गया। धनुष भंग होते ही पूरा प्रांगण 'जय श्री राम' और 'सियापति रामचंद्र की जय' के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। धनुष टूटने के पश्चात वातावरण में हर्षोल्लास की लहर दौड़ गई। माता सीता ने आगे बढ़कर अत्यंत प्रसन्नता और शालीनता के साथ प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला डाली। इस पावन और अलौकिक प्रसंग को देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। महिलाओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाए और पुष्प वर्षा कर इस ऐतिहासिक मिलन का स्वागत किया। लीला में असली रोमांच तब आया जब शिवधनुष टूटने की टंकार सुनकर क्रोधी स्वभाव वाले भगवान परशुराम अत्यंत आक्रोषित होकर सभा में प्रकट हुए। उनके तेज और गुस्से से पूरा दरबार थर्रा उठा। परशुराम जी ने धनुष तोड़ने वाले को सामने आने की ललकार दी। इस दौरान भगवान परशुराम और लक्ष्मण जी के बीच हुआ संवाद मंचन का सबसे रोचक हिस्सा रहा। लक्ष्मण जी के तीखे, तर्कपूर्ण और व्यंग्य भरे वचनों ने जहां एक ओर दर्शकों को गुदगुदाया, वहीं सभा में थोड़ी देर के लिए तनाव भी उत्पन्न हो गया। स्थिति को संभालते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री श्रीराम ने अत्यंत शांत, शीतल और विनम्र भाव से आगे आकर परशुराम जी को प्रणाम किया। श्रीराम के आदरभाव और उनके वास्तविक स्वरूप के बोध ने क्रोधी महर्षि का अहंकार और क्रोध शांत कर दिया। अपनी भूल का आभास होने पर परशुराम जी ने प्रभु श्रीराम को गले लगाया, उनकी स्तुति की और उन्हें आशीर्वाद देकर गंतव्य के लिए प्रस्थान किया। इस सुखद अंत के साथ चौथे दिन की लीला का समापन हुआ। वृंदावन से आए पंडित शास्त्री राम शंकर शर्मा ने अपने मुखारविंद से लोगों को निहाल किया। श्री विष्णु क्लब के महासचिव प्रेम शर्मा ने बताया कि इस बार की रामलीला में आधुनिक तकनीक, प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि प्रभावों का बेहतरीन तालमेल बिठाया गया है, जिससे दर्शकों को हर एक प्रसंग जीवंत प्रतीत हो रहा है। आने वाले दिनों में रावण वध और लंका दहन जैसे मुख्य आकर्षणों का मंचन किया जाएगा। इस मौके पर इस मौके पर दीपक सेठी, प्रेम शर्मा, आकाश साहनी, सुमित कथूरिया, हैरी हमराज, सुभाष मेहरा, अरविंद साहनी, सुरेश गुगलानी, विकास सेठी, अरुण भारद्वाज, अशोक शर्मा, विकास सुखीजा,रोहित मेहता, लवली बजाज, केवल सेठी, वीरेंदर वधवा, टिंकू सिंह नेगी, दीपक ऐलावादी, अंकुश मेहता, साहिल शर्मा, अजय डोडा, रिंकू शर्मा, रवि शर्मा, विकास ऐलावादी, धीरज ग्रोवर, पंकज ग्रोवर, रूपांश चावला, प्रिंस शर्मा, शंटी ग्रोवर, साकु, सुनील तनेजा,वंश, नरेंद्र चोपड़ा, अंकित शर्मा, लोकेश, जतिन नागपाल,राकेश ग्रोवर, अजय कैथ इत्यादि उपस्थित रहे।