हिसार में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, 28 हजार 110 मामलों का हुआ निपटारा

 
हिसार में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन, 28 हजार 110 मामलों का हुआ निपटारा

हिसार | हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पंचकूला के निर्देशानुसार व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हिसार के चेयरमैन के मार्गदर्शन में शनिवार को हिसार, हांसी, बरवाला व नारनौंद के न्यायिक परिसरों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।

यह जानकारी देते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हिसार की चेयरपर्सन एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश अलका मलिक ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 9 बेंच स्थापित की गई थीं। इन बेंचों द्वारा लंबित मामलों का निपटारा किया गया, जिसमें मोटर व्हीकल एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के 76 मुकदमों में से 39 केसों में 2 करोड़ 62 लाख 31 हजार रुपये के क्लेम पास किए गए। चेक बाउंस के 1365 केसों में से 1355 केसों का फैसला किया गया। समरी चालान के 629 मुकदमों में से 566 केसों का फैसला किया गया।

उन्होंने बताया कि लोक अदालत के जरिए मुकदमों का समाधान सबसे सस्ता व सरल जरिया है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि लोक अदालत में फैसला हुए मुकदमों की कोई अपील नहीं हो सकती। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 29 हजार 912 मुकदमों में से 28 हजार 110 केसों का निपटारा किया गया।

उन्होंने बताया कि लोक अदालत में 9 बेंच स्थापित किए गए थे, जिनमें बेंच नंबर-1 पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीत सहगल, बेंच नंबर-2 पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जैस्मिन शर्मा, बेंच नंबर-3 पर अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश (फैमिली कोर्ट) मधुलिका, बेंच नंबर-4 पर एसीजेएम अनुराधा, बेंच नंबर-5 पर जेएमआईसी हर्षा शर्मा, बेंच नंबर-6 पर जेएमआईसी सुखवीर कौर, बेंच नंबर-7 पर जेएमआईसी नवनूर कौर हांसी में, बेंच नंबर-8 पर जेएमआईसी खुश करण जोत सिंह गिल नारनौंद में तथा बेंच नंबर-9 पर जेएमआईसी सुनील कुमार बरवाला में अलग-अलग मामलों की सुनवाई की। राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान परिवार न्यायालय में एक प्रेरणादायक मामला सामने आया। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश मधुलिका की अदालत में लंबित वैवाहिक विवाद का अधिवक्ता मीनू रेहेजा के सहयोग से आपसी सहमति से निपटारा हुआ। लंबे समय से तलाक की कगार पर पहुंचा यह परिवार फिर से जुड़ गया। फैसले के बाद दोनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर साथ रहने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि लोक अदालतें न केवल लंबित मामलों के समाधान का प्रभावी माध्यम हैं, बल्कि यह सामाजिक समरसता और आपसी समझ को बढ़ावा देती हैं। इन अदालतों में विवादित पक्ष अपने मामलों को सौहार्दपूर्ण वातावरण में निपटाते हैं, जिससे अपील या संशोधन की जरूरत नहीं रहती और न्याय त्वरित रूप से प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त पक्षकारों को उनके द्वारा दी गई अदालती फीस भी वापस मिलती है।