जनवादी लेखक संघ की मासिक काव्य.गोष्ठी टाउन पार्क में अनीता शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। मंच संचालन जय भगवान लाडवाल ने किया। गोष्ठी सबसे पहले दो मिनट का मौन रख कर प्रो इन्द्रजीत नाहल को श्रदांजलि दी गई। इस अवसर पर जय भगवान लाडवाल ने जाने वाले को कौन सकता है रोक, रह जाती है यादे और रह जाता है शोक, जाए जिन्दगी बीत सिर्फ तोड़ते निवाले को ही याद आते है जगत में अच्छे काम करने वाले कविता सुनाई । बबली लाग्बा ने नहीं जाना कहाँ जहाँ पीठ पीछे छूरिया चलती हो हम महोब्बत के पुजारी है नफ रत के सौदागर नही कविता सुनाई। मास्टर कृष्ण इदौरा ने यूँ सुनाया. आत्मा अमर है अजर है भक्तों को विश्वास दिलाए गुरु ये शरीर नश्वर है खुद मसाज कराए गुरु कविता सुनाई। भीम सिहँ ये मन्दिर मस्जिद चर्च गुरुदारे आजकल बन गए है राजनीति के अखाडे कविता सुनाई। कवि नरेश पिंगल ने कौन किमी का होता है दुआ है किसी का कौन थमी हुई है लहरें तुम भी दिखता मौन कविता सुनाई। वरिन्न कवि ऋषि ने ये जगे नही आसान इतना समझना चाहिए हम रहे ना रहे भारत रहना चाहिए। इस अवसर पर राजेंद्र अग्रवाल लाल बहादुर शर्मा व राजेन्द गुप्ता आदि ने भी काव्य पाठ किया !
