समयबद्ध नागरिक सेवाओं के लिए हरसमय पोर्टल को मिले पूरे 10 में से 10 अंक

 
 समयबद्ध नागरिक सेवाओं के लिए हरसमय पोर्टल को मिले पूरे 10 में से 10 अंक

 नए आपराधिक कानून डैशबोर्ड पर हरियाणा का बेहतरीन प्रदर्शन

चंडीगढ़, 16 अक्टूबर-हरियाणा ने नए आपराधिक कानूनों के राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर 95.28 अंकों के साथ बेहतरीन प्रदर्षन करते हुए 7 जून से अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा है। वहीं, हरसमय पोर्टल के माध्यम से नागरिक सेवाएं निर्धारित समय-सीमा में प्रदान करने के मामले में राज्य को 10 में से 10 अंक मिले हैं।

यह जानकारी आज यहां मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज यहां हुई अपराध एवं आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क तथा प्रणालियां (सीसीटीएनएस) और इंटर-आॅप्रेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के क्रियान्वयन संबंधी राज्य स्तरीय शीर्ष समिति की 34वीं बैठक में दी गई।

बैठक में सीसीटीएनएस और आईसीजेएस 2.0 के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। साथ ही, पुलिस, न्यायालयों, अभियोजन एजेंसियों, जेलों और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के बीच समन्वय मजबूत करने के लिए तकनीक आधारित विभिन्न पहलों की प्रगति का जायजा लिया गया।

राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की पुलिस अधीक्षक नितिका गहलौत ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों के राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर हरियाणा को 95.28 अंक मिले हैं। असम को 94.65 और चंडीगढ़ को 92.80 अंक प्राप्त हुए हैं। प्रशासनिक सुधारों में राज्य को 20 में से 20 अंक तथा प्रणाली एकीकरण में 10 में से 10 अंक मिले हैं। परिचालन दक्षता में 45 में से 40.40 अंक और सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग में 25 में से 24.88 अंक प्राप्त हुए हैं।

उन्होंने बताया कि नागरिक सेवाओं के लिए अधिकार-सेवा डैशबोर्ड पर भी हरियाणा लगातार 10 में से 10 अंक प्राप्त कर रहा है। हरसमय पोर्टल के माध्यम से प्राप्त आवेदनों का सभी प्रमुख विभागों द्वारा निर्धारित समय-सीमा में निपटान सुनिश्चित किया जा रहा है। नागरिकों की सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पोर्टल पर पंजीकृत नागरिक यूजन आईडी के माध्यम से मोबाइल नंबर ब्लॉक करने का अनुरोध प्रस्तुत करने पर अब पावती रसीद भी जारी की जाती है, जिससे आवेदक को आवेदन जमा होने की तत्काल पुष्टि मिल जाती है।

मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने नए आपराधिक कानूनों और अधिकार-सेवा डैशबोर्ड पर राज्य के प्रदर्शन की सराहना करते हुए संबंधित विभागों के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने समयबद्ध नागरिक सेवाएं उपलब्ध करवाने तथा राज्य में तकनीक आधारित आपराधिक न्याय सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए समन्वित प्रयास जारी रखने पर जोर दिया।

बैठक में बताया गया कि पुलिस जांच रिकाॅर्ड को न्यायिक प्रणाली के साथ एकीकृत करने की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। दस जिलों में इलेक्ट्रॉनिक आरोप-पत्र दाखिल करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जा चुका है। शेष जिलों में संबंधित जिला न्यायाधीशों के साथ विचार-विमर्श पूरा कर लिया गया है और वहां भी इस प्रणाली को शीघ्र लागू किए जाने की उम्मीद है।

समिति ने जिला न्यायालयों में न्याय श्रुति प्रणाली के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की। इसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा चुके हैं और प्रणाली को लागू करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए उच्च न्यायालय से आगे के दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।

बैठक में सीसीटीएनएस और आईसीजेएस 2.0 के अंतर्गत जांच संबंधी बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हरियाणा में पुलिस, जेलों, अभियोजन एजेंसियों और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के लिए प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे के विकास, नेटवर्क कनेक्टिविटी तथा उपकरणों की खरीद के लिए लगभग 34 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है।

समिति ने आईसीजेएस 2.0 के अंतर्गत 1,029 मोबाइल डेटा टर्मिनल और निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रणाली सहित 1,700 डेस्कटॉप कंप्यूटर खरीदने को भी मंजूरी दी। इसके अतिरिक्त, बैठक में डिजिटल उपकरणों की आपूर्ति के तहत 2,489 सिंगल-फिंगरप्रिंट स्कैनर, 1,688 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एवं वेब कैमरे, 411 फोरेंसिक साक्ष्य उपकरण तथा टैबलेट आधारित उपस्थिति दर्ज करने वाले 86 उपकरणों की आपूर्ति के संबंध में भी प्रगति की जानकारी दी गई।

जांच प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान में तेजी लाने के लिए विशेष डिजिटल मंचों को एकीकृत करने की योजनाओं पर भी चर्चा की गई। इसके तहत शस्त्र प्रशिक्षण प्रमाण-पत्रों के रिकॉर्ड को सीसीटीएनएस-शस्त्र लाइसेंस पोर्टल से जोड़ने के लिए एक एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे प्रमाण-पत्रों का सत्यापन तेज होगा और संबंधित सूचनाओं का निर्बाध आदान-प्रदान संभव होगा।

इसके अतिरिक्त, ट्रेकिया फोरेंसिक एप्लीकेशन को सीसीटीएनएस से जोड़ने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। इससे फोरेंसिक संबंधी जानकारी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से साझा की जा सकेगी और फोरेंसिक प्रक्रिया तथा पुलिस के अपराध रिकॉर्ड के बीच समन्वय मजबूत होगा।

समिति ने लंबित तकनीकी खरीद, वित्तीय आवंटन तथा आपराधिक न्याय प्रणाली की दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई डिजिटल पहलों की प्रगति की भी समीक्षा की। इन सुधारों का उद्देश्य आपराधिक न्याय व्यवस्था को अधिक एकीकृत, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाना, जांच क्षमता में सुधार करना तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं के इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान में तेजी लाना है।

बैठक में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल, आधुनिकीकरण एवं कल्याण शाखा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अमिताभ सिंह ढिल्लों तथा विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।