चण्डीगढ़ 17 सितम्बर - हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला द्वारा सप्त सिंधु की इतिहासकारी में हरभजन सिंह सेलबराह का योगदान विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन पंचकूला अकादमी भवन में किया गया।
अकादमी के प्रवक्ता ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि हरभजन सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में अपनी इतिहास लेखन की प्रक्रिया का विस्तार से उल्लेख किया। गांव-गांव में जाकर गांवों का सामाजिक व सांस्कृतिक इतिहास की सामग्री एकत्रित की। इसमें हरिद्वार के पंडितों की वंषावली को मुख्य स्त्रोत बनाया। आज की सभ्यता ग्रामीण गांवों को समाप्त कर रही है इसलिए आज भी गांवों का इतिहास लिखा जाना बहुत जरूरी है।
मुख्य अतिथि एवं पूर्व कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि विष्व इतिहास में भारत का इतिहास सबसे प्राचीन है। मेसोपोटेमिया व नीलघाटी की सभ्यता यदि 3000 वर्ष पूर्व की है तो भारत का इतिहास तो और भी पुराना है। राखीगढ़ी के अवषेष इसे 7-8 हजार वर्ष पीछे तक ले जाते हैं। दुनिया के सबसे पुराने ग्रंथ ऋग्वेद में सप्तसिंधु क्षेत्र का उल्लेख है जो धन धान्य सम्पन्न क्षेत्र था। इस एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान अनेक इतिहास लेखक उपस्थित थे जिन्होंने अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
