ठोस कचरा प्रबंधन के संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी नियमों की अनुपालना करें सुनिश्चित:- उपायुक्त सतबीर सिंह
- ठोस कचरा प्रबंधन बारे उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक आयोजित
रोहतक, 6 अक्तूबर: उपायुक्त सतबीर सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि वे माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ठोस कचरा प्रबंधन के संदर्भ में जारी निर्देशों की पालना सुनिश्चित करें। जिला प्रशासन द्वारा इस संदर्भ में आदेश जारी किये गये है। सभी अधिकारी इन आदेशों व ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का अध्ययन कर क्रियान्वयन करवाये।
सतबीर सिंह स्थानीय लघु सचिवालय स्थित सभागार में ठोस कचरा प्रबंधन बारे आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी हिदायतों को गंभीरता से लेते हुए इनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा मात्रा में ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले प्रतिष्ठानों, संस्थानों की पहचान के कार्य को 12 अक्तूबर तक पूर्ण करें तथा नवंबर माह के प्रथम सप्ताह तक अल्पकालीन अनुपालना रिपोर्ट भिजवाना सुनिश्चित करें।
उपायुक्त सतबीर सिंह ने कहा कि संबंधित प्रतिष्ठानों व संस्थानों की पहचान के बाद पोर्टल पर पंजीकरण करवाना सुनिश्चित किया जाये। इसके लिए जिला स्तर पर विशेष सेल गठित की जा रही है, जिसके नोडल अधिकारी नगराधीश होंगे। उन्होंने कहा कि जारी आदेशों के अनुसार ठोस कचरे को अलग करना, भंडारण तथा निष्पादन करवाया जाये। इसके लिए ग्राम सभा, वार्ड सभा गठित की गई है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान में शामिल किया जाये।
सतबीर सिंह ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल व काॅलेज स्तर पर शिक्षक व विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाये। प्रशिक्षण के बाद घरेलू पर्यवेक्षक तैनात किये जाये। ज्यादा मात्रा में ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले सभी प्रतिष्ठानों व संस्थानों में चार रंग के डस्टबिन रखना अनिवार्य होगा। ठोस कचरे को पृथक्करण स्रोत पर कचरे को अनिवार्य रूप से गीला कचरा (हरा), सूखा कचरा (नीला), सैनिटरी कचरा (लाल) और विशेष देखभाल/खतरनाक कचरा (काला) में अलग करना होगा। इन आदेशों की उल्लंघना करने वाले प्रतिष्ठानों व संस्थानों के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।
अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार ने कहा कि थोक कचरा उत्पादक के तहत प्रतिष्ठान/संस्थान का निर्मित क्षेत्र 20,000 वर्ग मीटर या अधिक, पानी की खपत 40,000 लीटर/दिन या अधिक, या कचरा उत्पादन 100 किलोग्राम/दिन या अधिक है, उन्हें थोक कचरा उत्पादक माना जाएगा। ऐसे संस्थानों को कचरे का परिसर में ही प्रसंस्करण करना और पोर्टल पर पंजीकरण कराना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा कि अधिकारी शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में स्थित रेस्टोरेंट, ढाबा, फैक्ट्री, महाविद्यालय इत्यादि की पहचान करें। उन्होंने कहा कि यह समयबद्ध प्रक्रिया है तथा समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये।
इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार, सांपला की उपमंडलाधीश अंकिता पुवार, सहायक आयुक्त प्रशिक्षु विशाल सिंह, डीएफओ पुष्कर, प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण के सचिव वीरेंद्र सिंह ढुल, नगर निगम की संयुक्त आयुक्त नमिता सिंह, महम के उपमंडलाधीश विपिन कुमार, नगराधीश शुभम, पुलिस उपाधीक्षक राजेश कुमार, मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी तनुमय दत्ता, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजपाल चहल, परिवहन महाप्रबंधक नवीन कुमार सहित संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी मौजूद रहे।
