बाल साहित्य में डॉ. सत्यवान सौरभ का परचम, ‘प्रज्ञान’ को मिला 31 हजार रुपये का श्रेष्ठ कृति पुरस्कार
मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी का श्रेष्ठ कृति सम्मान, पीएच.डी. साहित्यकार दंपती डॉ. सत्यवान सौरभ व डॉ. प्रियंका सौरभ की 27 पुस्तकों के साहित्यिक सफर में जुड़ी नई उपलब्धि; बेटे प्रज्ञान के नाम पर लिखी पुस्तक दुनिया के सभी बच्चों को समर्पित
भिवानी। साहित्यकार एवं लेखक डॉ. सत्यवान सौरभ की बाल साहित्य कृति ‘प्रज्ञान’ को हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के वर्ष 2023 के श्रेष्ठ कृति पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। अकादमी द्वारा घोषित परिणामों में ‘प्रज्ञान’ का चयन बाल साहित्य वर्ग में किया गया है। इस पुरस्कार के अंतर्गत चयनित कृति को 31 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ने हिंदी, हरियाणवी, संस्कृत एवं पंजाबी सहित विभिन्न भाषाओं में प्राप्त साहित्यिक कृतियों के लिए वर्ष 2023 के परिणाम घोषित किए हैं। अकादमी की श्रेष्ठ कृति पुरस्कार योजना के अंतर्गत विभिन्न साहित्यिक विधाओं में श्रेष्ठ रचनाओं का चयन किया गया है। इसी क्रम में बड़वा (भिवानी) के डॉ. सत्यवान सौरभ की ‘प्रज्ञान’ को बाल साहित्य वर्ग में सम्मान के लिए चुना गया है।
‘प्रज्ञान’ डॉ. सत्यवान सौरभ की बाल साहित्य पर केंद्रित कृति है, जिसमें बच्चों के लिए साहित्यिक, संस्कारपरक एवं विचारपरक सामग्री प्रस्तुत की गई है। इस पुस्तक की विशेष बात यह है कि लेखक ने इसे अपने बेटे प्रज्ञान के जन्म के अवसर पर दुनिया के सभी बच्चों को समर्पित किया है। पुस्तक के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता, संस्कार और रचनात्मक सोच को साहित्य से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
डॉ. सौरभ लंबे समय से लेखन, पत्रकारिता और साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार, समकालीन विषयों तथा बाल साहित्य के प्रति विशेष रुचि दिखाई देती है। विभिन्न विधाओं में सक्रिय उनकी साहित्यिक यात्रा में ‘प्रज्ञान’ बाल साहित्य के प्रति उनके रचनात्मक सरोकार को सामने लाती है।
हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री के अनुसार वर्ष 2023 की श्रेष्ठ कृति पुरस्कार योजना के परिणामों को अकादमी अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित किया गया है। बाल साहित्य वर्ग में डॉ. सत्यवान सौरभ की ‘प्रज्ञान’ का चयन इसी प्रक्रिया के तहत हुआ है।
डॉ. सत्यवान सौरभ की साहित्यिक यात्रा में यह सम्मान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ा है। उनकी कृति को राज्य की साहित्यिक संस्था द्वारा बाल साहित्य की श्रेष्ठ कृतियों में स्थान मिलना बच्चों के लिए साहित्य लेखन के क्षेत्र में उनके योगदान की संस्थागत मान्यता है।
डॉ. सत्यवान सौरभ ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “बाल साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों के संस्कार, कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और विचार-निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है।” बच्चों के लिए सार्थक और मूल्यपरक साहित्य का सृजन उनकी साहित्यिक प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।
डॉ. सत्यवान सौरभ की पत्नी डॉ. प्रियंका सौरभ भी चर्चित लेखिका एवं साहित्यकार हैं। दोनों ने राजनीतिक विज्ञान में पीएच.डी. की है और साहित्य लेखन के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए संयुक्त रूप से तथा स्वतंत्र रूप से अनेक पुस्तकों का लेखन किया है। दोनों के लेखन में सामाजिक सरोकार, समकालीन विमर्श, महिला सशक्तीकरण, बाल साहित्य और सामाजिक चेतना जैसे विषय प्रमुखता से उभरते हैं। दोनों साहित्यकारों की अब तक 27 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा ‘प्रज्ञान’ को 31 हजार रुपये के श्रेष्ठ कृति पुरस्कार के लिए चयनित किए जाने से भिवानी के साहित्यिक क्षेत्र में भी प्रसन्नता का माहौल है। साहित्य जगत से जुड़े लोगों ने डॉ. सत्यवान सौरभ को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए इसे भिवानी के साहित्यिक परिदृश्य के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
