मॉडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पॉक्सो एक्ट के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
बच्चों को किसी भी अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में चुप न रहने और इसकी सूचना देने के लिए किया प्रेरित
रोहतक,
जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अजय तेवतिया के मार्गदर्शन में आयोजित पोक्सो एक्ट के प्रति जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को बाल संरक्षण कानूनों की जानकारी देते हुए सुरक्षित बचपन का संदेश दिया गया। प्राधिकरण की सचिव एवं सीजेएम डाॅ तरन्नुम खान ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बच्चों के अधिकारों की रक्षा, कानूनी जागरूकता बढ़ाने तथा समाज के विभिन्न वर्गों को उनके कानूनी अधिकारों से अवगत करवाने के उद्देश्य से इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार नालसा के सुरक्षित बचपन जागरूकता अभियान के तहत मॉडर्न सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पॉक्सो एक्ट 2012 के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. तरन्नुम खान ने विद्यार्थियों को बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों एवं उनके अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. तरन्नुम खान ने कहा कि पॉक्सो एक्ट का मुख्य उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा प्रदान करना तथा उनके लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।
प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित माहौल में रहने, अपनी गरिमा बनाए रखने और भयमुक्त होकर शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस कानून के विभिन्न प्रावधानों एवं बच्चों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक किया।
सीजेएम ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसकी जानकारी तुरंत अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए। बच्चों को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक एवं सतर्क रहना चाहिए तथा किसी भी परेशानी की स्थिति में विश्वसनीय व्यक्ति से सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
डॉ. तरन्नुम खान ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा संबंधी कानूनों की जानकारी देना समय की आवश्यकताहै। इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने तथा उन्हें शोषण के प्रति सचेत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
