नवीन पुनिया के हरियाणवी गीतों पर झूमे दर्शक, सूरजकुंड दिवाली मेले में जमा रंग
लोकगीतों और सुरीली आवाज से गायक ने बांधा समां, दर्शकों ने तालियां बजाकर किया उत्साहवर्धन
डॉ. सीपी यादव के मेजिक शो ने सबको अचरज किया, बच्चों ने नजरे जमाए रखी
सूरजकुंड (फरीदाबाद),
हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा ‘आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी मेला’ की थीम पर आधारित तृतीय सूरजकुंड दिवाली मेले में रविवार दोपहर हरियाणवी गायक नवीन पुनिया ने अपनी गायकी से मंच पर समां बांध दिया। उनके लोकप्रिय गीतों पर श्रोता झूमने को मजबूर हो गए। हरियाणवी संगीत की मिठास और दमदार प्रस्तुति ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। जैसे ही गायक ने अपने चर्चित गीतों की प्रस्तुति शुरू की, दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। पूरे कार्यक्रम के दौरान मेले का माहौल संगीत और मनोरंजन से सराबोर रहा। वहीं डॉ. सीपी यादव ने अपने मेजिक शो से सभी दर्शकों को अचरज में डालने का काम किया। बच्चों ने इस मैजिक शो का भरपूर आनंद लिया।
हरियाणवी गायक नवीन पुनिया ने अपनी प्रस्तुति में हरियाणवी संगीत के साथ रोमांटिक गीतों का भी रंग जमाया। उन्होंने ‘ओ रे मानस घणे गजब के’, ‘मुझे इश्क तेरा तड़पावे’, ‘तेरी आंख्यां का ये काजल’ और ‘मने पल-पल याद तेरी तड़पावे’ जैसे लोकप्रिय गीतों से दर्शकों का मनोरंजन किया। उनकी गायकी पर श्रोताओं ने खूब तालियां बजाईं और संगीत की धुनों पर आनंद लिया। कलाकार की प्रस्तुति ने हरियाणवी लोकसंगीत के प्रति लोगों के उत्साह को भी प्रदर्शित किया।
पर्यटन और हरियाणवी संस्कृति को मिल रहा मंच
हरियाणवी गायक नवीन पुनिया ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश की कला, संस्कृति और पर्यटन को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सूरजकुंड दिवाली मेला ऐसे आयोजनों का महत्वपूर्ण मंच है, जहां लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के पर्यटन एवं विरासत मंत्री अरविंद शर्मा के मार्गदर्शन में पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े आयोजनों को बढ़ावा देने का उद्देश्य प्रदेश की परंपराओं को नई पहचान देना है। सूरजकुंड दिवाली मेले में हरियाणवी गायकों की प्रस्तुतियां स्थानीय लोकसंगीत को प्रोत्साहित करने के साथ ही देशभर से आने वाले पर्यटकों को हरियाणा की संस्कृति से परिचित कराती हैं। मेले में संगीत, कला और पारंपरिक संस्कृति का संगम दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
