वायु प्रदूषण के साथ ही जल प्रदूषण नियंत्रण भी बेहद जरूरी : डीसी
 

 
वायु प्रदूषण के साथ ही जल प्रदूषण नियंत्रण भी बेहद जरूरी : डीसी

झज्जर जिला में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बढ़ाए जा रहे हैं कदम

डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा-ड्रेनों में दूषित पानी छोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

डीसी वर्षा खांगवाल ने अधिकारियों की बैठक में केसीबी मुंगेशपुर और ड्रेन नंबर आठ की नियमित निगरानी के निर्देश

झज्जर, 28 अक्टूबर

जिला प्रशासन आमजन को स्वच्छ वातावरण मुहैया कराने की दिशा में सक्रियता से कदम बढ़ा रहा है। वायु प्रदूषण रोकथाम के साथ ही जल प्रदूषण नियंत्रण पर भी प्रशासन का विशेष फोकस है। डीसी वर्षा खांगवाल प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे हर पहलू पर गंभीरता से मॉनिटरिंग कर रही हैं।
डीसी ने कहा कि झज्जर जिला की सीमा से गुजरने वाली ड्रेन में केमिकलयुक्त और सीवरेज का दूषित पानी छोड़ने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा। इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारी नियमित निगरानी सुनिश्चित करें और नियमों का उल्लंघन करने वाले औद्योगिक संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि दूषित पानी की निकासी से यमुना नदी प्रदूषित होने की आशंका बनी रहती है, जिसे रोकने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। डीसी ने बुधवार को मंडल आयुक्त मोनिका मलिक के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक में आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
डीसी ने कहा कि कई बार सेप्टिक टैंकर के माध्यम से भी गंदा पानी नालों और ड्रेन में छोड़े जाने की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे मामलों की जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला से गुजरने वाली मुंगेशपुर ड्रेन, ड्रेन नंबर आठ और केसीबी ड्रेन में केमिकल युक्त दूषित पानी छोड़ने की किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ड्रेनों के माध्यम से यह दूषित पानी यमुना नदी तक पहुंचता है, जिससे जल प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। पानी में अमोनिया की मात्रा बढ़ना भी चिंता का विषय है।

औद्योगिक इकाइयों की नियमित जांच के निर्देश

डीसी वर्षा खांगवाल ने सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन औद्योगिक इकाइयों में दूषित पानी के शोधन के लिए कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) की व्यवस्था नहीं है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले पानी की नियमित जांच की जाए और यदि किसी फैक्टरी का दूषित पानी ड्रेन में पहुंचता पाया जाता है, तो संबंधित इकाई को नियमानुसार नोटिस जारी कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) की भी जांच की जाए, ताकि दूषित पानी का उचित शोधन सुनिश्चित हो सके।

कसार लिंक ड्रेन के सभी पॉइंट की होगी जांच

डीसी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को कसार लिंक ड्रेन के सभी पॉइंट की जांच करने और नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ड्रेनों में गंदे पानी की निकासी रोकने के लिए सभी संबंधित विभाग जिम्मेदारी से कार्य करें। प्रदूषण नियंत्रण के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी इकाई से बिना उचित शोधन के दूषित पानी बाहर न निकले।

यह रहे मौजूद

बैठक में एडीसी जगनिवास, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता सतीश कुमार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. सुनील श्योराण, जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन अमन मोर, सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता पुनीत साहनी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।