रबी सीजन में जिला भिवानी में 6.82 लाख एकड़ में होगी बिजाई: डा. राजेश सिहाग
किसान डीएपी के विकल्प के तौर अन्य वैकल्पिक उर्वरकों का इस्तेमाल करें
भिवानी,
रबी सीजन 2026-27 के दौरान भिवानी जिले में लगभग 6 लाख 82 हजार एकड़ क्षेत्र में बिजाई होने की संभावना है। इसमें मुख्य रूप से करीब 3 लाख 30 हजार एकड़ में सरसों और 2 लाख 75 हजार एकड़ में गेहूं की बिजाई प्रस्तावित है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों से सरसों की बिजाई के लिए डीएपी खाद पर निर्भरता कम करते हुए अन्य वैकल्पिक उर्वरकों का इस्तेमाल करने की अपील की है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डा. राजेश सिहाग ने बताया कि वर्ष 2026-27 में एक अप्रैल 2026 से अब तक जिले में 55,734 मीट्रिक टन यूरिया और 22,328 मीट्रिक टन डीएपी खाद उपलब्ध करवाई जा चुकी है। एक अक्टूबर 2026 को जिले में 18,613.35 मीट्रिक टन यूरिया और 3,574.50 मीट्रिक टन डीएपी का स्टॉक उपलब्ध था। उन्होंने बताया कि उपलब्ध स्टॉक में से रबी सीजन के लिए किसान अब तक 6,066.93 मीट्रिक टन यूरिया तथा 6,405.20 मीट्रिक टन डीएपी खरीद चुके हैं। उन्होंने बताया कि आवश्यकता के अनुसार समय-समय पर खाद की रैक भी पहुंच रही हैं। इसके अतिरिक्त जिले में 2,104 मीट्रिक टन एनपीके, 2,766 मीट्रिक टन एसएसपी और 584 मीट्रिक टन एमओपी खाद भी उपलब्ध है।
उन्होंने किसानों को सलाह देते हुए कहा है कि सरसों की बिजाई के लिए डीएपी के स्थान पर अन्य विकल्पों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें प्रति एकड़ 150 किलोग्राम एसएसपी के साथ 35 से 40 किलोग्राम यूरिया, 50 किलोग्राम एनपीके 12:32:16, 50 किलोग्राम टीएसपी के साथ 20 से 25 किलोग्राम यूरिया तथा नैनो डीएपी जैसे विकल्प शामिल हैं।
उन्होंने किसानों को उर्वरकों के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सिफारिशों के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें। डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता कम करते हुए एसएसपी, विभिन्न ग्रेड के एनपीके, नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे वैकल्पिक उर्वरकों को अपनाएं। संतुलित पोषण प्रबंधन से उत्पादन लागत कम करने के साथ-साथ भूमि की उर्वरता और उत्पादकता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के निर्देशानुसार किसानों तक खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 60 प्रतिशत खाद हैफेड, सहकारी समितियों आदि के माध्यम से तथा 40 प्रतिशत खाद निजी डीलरों के माध्यम से वितरित की जा रही है। विभाग का उद्देश्य रबी सीजन के दौरान किसानों को जरूरत के अनुसार समय पर खाद उपलब्ध करवाना और उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना है।
