स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशु देखरेख में दिया गया प्रशिक्षण

 
स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशु देखरेख में दिया गया प्रशिक्षण

गुरुग्राम, 10 मई — नवजात शिशु को जन्म के पहले ‘गोल्डन मिनट ‘ में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी की मदद मिले, इस विषय को लेकर रविवार को देशभर के बीस हज़ार से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सा पेशेवरों को नवजात शिशु देखभाल का प्रशिक्षण आज दिया गया । 

यह विशाल राष्ट्रव्यापी अभियान नेशनल नियो नेटल फोरम (एनएनएफ) इंडिया की प्रेसिडेंशियल एक्शन प्लान 2026 का हिस्सा था , जिसका उद्देश्य देशभर में नवजात के जीवन की रक्षा करने का व्यापक प्रशिक्षण देकर नवजात शिशुओं की जीवन रक्षा प्रणाली को मजबूत करना रहा । इसी उद्देश्य को लेकर रविवार को एनएनएफ इंडिया ने “राष्ट्रव्यापी एनआरपी प्रशिक्षण दिवस ” का आयोजन किया । गुरुग्राम में यह कार्यक्रम सेक्टर 15 स्थित कृष्णा मेडी हेल्थकेयर संस्थान के सहयोग से आयोजित किया गया। 

कार्यक्रम के समन्वयन गुरुग्राम के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ बलराज सिंह यादव ने बताया कि भारत में शिशु मृत्यु दर एक हज़ार जन्म पर 25 की है जबकि जापान , फिनलैंड, स्वीडन और नॉर्वे जैसे देशों में यह दर एक हज़ार शिशु जन्म पर मात्र दो है । अमेरिका जैसे विकसित देशों में यह दर 5 है । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का जो संकल्प और लक्ष्य देशवासियों को दिया है, उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है । शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में जन्म लेने वाले प्रत्येक 10 में से एक शिशु को जन्म के समय सांस लेने में दिक्कत होती है और उसे स्वास्थ्य कर्मियों की सहायता की आवश्यकता होती है। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को जन्म के तुरंत बाद “गोल्डन मिनट” के दौरान नवजात शिशु की जान बचाने हेतु आवश्यक व्यावहारिक कौशल प्रदान करने पर केंद्रित रहा ।

स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशु देखरेख में दिया गया प्रशिक्षण

डॉ यादव ने बताया कि इस अनूठी राष्ट्रव्यापी पहल को भारत सरकार, इंडियन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स, भारतीय फेडरेशन ऑफ़ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनीकॉलॉजिस्ट्स , ट्रेंड नर्सिज एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन तथा यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित किया गया है ।

इस कार्यक्रम के तहत रविवार को एक ही दिन में देश के बीस हज़ार से अधिक स्वास्थ्य पेशेवरों को बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम (एनआरपी ) कौशल का प्रशिक्षण दिया गया । उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य देश में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर ) को कम करना था ।

डॉ बलराज सिंह यादव के अनुसार यह अभियान देश के 18 से अधिक राज्यों में संचालित किया गया , जहां अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए।

इस पहल का नेतृत्व एन एनएफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ ललन के भारती ने किया । उनके साथ महासचिव डॉ अमित उपाध्याय, नेशनल चेयर पर्सन डॉ एस निम्बालकर, नेशनल कॉर्डिनेटर डॉ विकास गोयल तथा कन्वीनर डॉ शरण्या मैनिकराज ने सहयोग किया ।

गुरुग्राम कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. बलराज सिंह यादव द्वारा किया गया और जिला के प्रख्यात चिकित्सक डॉ जे पी दधीचि, डॉ गोपाल अग्रवाल तथा डॉ विनीता यादव भी इस पहल से जुड़े ।

डॉ. बलराज सिंह यादव ने कहा कि प्रसव एवं नवजात देखभाल से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का प्रशिक्षित होना आवश्यक है, क्योंकि जन्म के समय त्वरित एवं सही जीवन रक्षा प्रक्रिया से नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार होता है तथा नवजात मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है ।

नवजात शिशुओं के जीवन बचाने के लिए इस अभियान को एक राष्ट्रीय मिशन बताते हुए डॉ. बलराज सिंह यादव ने कहा कि यह अभियान इस संदेश के साथ आयोजित किया गया —“एक दिन- एक राष्ट्र-एक मिशन-हर सांस के साथ नवजात जीवन की रक्षा।”

इस निःशुल्क बेसिक एनआरपी कोर्स को बाल रोग विशेषज्ञों एवं नियोनेटोलॉजिस्ट, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों, चिकित्सकों, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, मेडिकल अधिकारियों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सों, दाइयों तथा प्रसव कक्ष एवं नवजात देखभाल सेवाओं से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों के लिए तैयार किया गया ।

आयोजकों ने बताया कि यह पाठ्यक्रम साक्ष्य-आधारित एवं राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया, जिसमें केवल सैद्धांतिक ज्ञान की बजाय व्यावहारिक कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया।

आयोजकों ने बताया कि उत्कृष्ट प्रतिभागियों एवं कोर्स समन्वयकों को नियोकॉन-2026 के दौरान आयोजित होने वाले बेसिक एनआरपी ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिलेगा।