एसडीजी को गति देने हेतु बीआरआई अवसंरचना पर दूसरा वैश्विक व्यापार शिखर सम्मेलन सिंगापुर में आयोजित
सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को गति देने के लिए बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) अवसंरचना निवेश पर दूसरा वैश्विक व्यापार शिखर सम्मेलन "बेहतर विश्व के लिए जुड़ें" (Connect for Better World) विषय के तहत सिंगापुर में आयोजित किया गया। शिखर सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल कॉम्पैक्ट के "एसडीजी को गति देने के लिए बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव हेतु सतत अवसंरचना एक्शन प्लेटफॉर्म" द्वारा किया गया तथा यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट नेटवर्क सिंगापुर ने सह-आयोजक की भूमिका निभाई।
शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय संगठनों, वैश्विक और क्षेत्रीय उद्यमों, नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों तथा थिंक टैंकों के 300 से अधिक वरिष्ठ नेताओं और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर निजी क्षेत्र के नेतृत्व में सतत विकास से प्रेरित करीब एक दर्जन संयुक्त पहलों और नवोन्मेषी साझेदारियों की शुरुआत की गई, जिनका उद्देश्य 2030 सतत विकास एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए बीआरआई अवसंरचना सहयोग से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाना है।
शिखर सम्मेलन में एक घोषणा-पत्र अपनाया गया, जिसमें सतत अवसंरचना, जिम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), न्यायसंगत ऊर्जा संक्रमण, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की मजबूती, सतत वित्त, डिजिटल युग में महिलाओं और युवाओं का सशक्तिकरण तथा पारंपरिक चिकित्सा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संबंधित व्यावसायिक प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया। सम्मेलन में सतत ऊर्जा और सतत डिजिटल अवसंरचना पर विशेषज्ञ समूहों की भी शुरुआत की गई। इसके साथ ही निजी क्षेत्र के अग्रणी संस्थानों के नेतृत्व में हरित खनन, बिजली के कार्बन फुटप्रिंट मानक, जैव विविधता संरक्षण, महासागर संरक्षण, सतत परिवहन, महिला सूक्ष्म उद्यमों की वृद्धि तथा समावेशी वैश्विक विकास सहित 12 एसडीजी-प्रेरित परिणामों की घोषणा की गई।
संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव और यूएन ग्लोबल कॉम्पैक्ट की सीईओ सुश्री सांडा ओजियाम्बो ने कहा कि दीर्घकालिक सतत विकास के लिए लचीली और सक्षम अवसंरचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "आज शुरू की जा रही पहलें—सतत ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना पर नए विशेषज्ञ समूहों से लेकर जैव विविधता, हरित खनिजों और जिम्मेदार एआई पर नए दिशा-निर्देशों तक—यह दर्शाती हैं कि सार्थक प्रगति सीमाओं, क्षेत्रों और मूल्य शृंखलाओं के पार सहयोग पर निर्भर करती है।" उन्होंने आगे कहा कि बीआरआई फॉर एसडीजी एक्शन प्लेटफॉर्म के माध्यम से "कंपनियां व्यावहारिक दिशा-निर्देश विकसित करने, विशेषज्ञता साझा करने और ऐसे समाधानों पर सहयोग करने के लिए एकजुट हो रही हैं, जिन्हें विभिन्न उद्योगों और क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है।"
जलवायु कार्रवाई और न्यायसंगत संक्रमण पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष सलाहकार श्री सेलविन हार्ट ने कहा, "बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के माध्यम से चीनी व्यवसाय और वित्तीय संस्थान चीन की असाधारण स्वच्छ ऊर्जा क्षमताओं को विकासशील दुनिया में मौजूद विशाल विकास अवसरों से जोड़ने में मदद कर सकते हैं। ऊर्जा संक्रमण का अगला चरण यह दिखाना चाहिए कि बड़े पैमाने पर सहयोग से क्या हासिल किया जा सकता है। क्योंकि एक विभाजित दुनिया में हमारे सबसे बड़े अवसर सीमाओं के पीछे हटने से नहीं, बल्कि पुल बनाने—बाजारों को जोड़ने, निवेश जुटाने, समाधान साझा करने और मिलकर समृद्धि पैदा करने—से आएंगे।"
वर्ष 2026 संयुक्त राष्ट्र सतत परिवहन दशक की शुरुआत का प्रतीक है। सड़क सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत श्री जीन टॉड्ट ने कहा कि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव दुनिया के सबसे बड़े अवसंरचना और कनेक्टिविटी प्रयासों में से एक है और इसके व्यापक पैमाने के अनुरूप सुरक्षा के प्रति भी उतनी ही मजबूत प्रतिबद्धता आवश्यक है।
संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के अवर महासचिव श्री ली जुनहुआ ने शिखर सम्मेलन के समापन पर कहा, "आज की जटिल कनेक्टिविटी चुनौतियों से कोई भी देश अकेले नहीं निपट सकता। सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग हमें आपस में जुड़े रहने के लिए अत्यंत आवश्यक है। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव सीमापार कनेक्टिविटी को व्यवहार में उतारने का एक प्रमुख उदाहरण है।"
संयुक्त राष्ट्र एशिया और प्रशांत के आर्थिक और सामाजिक आयोग (यूएनईएसकैप) की कार्यकारी सचिव सुश्री आर्मिडा साल्सियाह अलीसजाहबाना, चीन में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर श्री स्टीफन जैक्सन तथा मलेशिया, सिंगापुर और ब्रुनेई दारुस्सलाम में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर श्री निकोलस मिंट ने सीमापार सहयोग को बढ़ावा देने में इस शिखर सम्मेलन की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता तथा सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में वैश्विक प्रगति में चीन, सिंगापुर और आसियान क्षेत्र के योगदान को भी रेखांकित किया।
