तीन-स्तरीय सत्यापन, बायोमेट्रिक और जियो-फेंसिंग से खरीद व्यवस्था हुई और मजबूत : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

विपक्ष किसानों को गुमराह करने के लिए कर रहा है बेवजह दुष्प्रचार, मुख्यमंत्री ने कहा किसान की फसल का एक एक दाना खरीदने के लिए सरकार प्रतिबद्ध

 
तीन-स्तरीय सत्यापन, बायोमेट्रिक और जियो-फेंसिंग से खरीद व्यवस्था हुई और मजबूत : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

चंडीगढ़, 8 अप्रैल -  हरियाणा के मुख्यमंत्री ने आज चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष खरीद व्यवस्था को लेकर बेवजह दुष्प्रचार कर किसानों को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसानों की  फसल के  एक –एक दाने की खरीद सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने खरीद प्रणाली में व्यापक सुधार लागू किए हैं तथा प्रत्येक मंडी में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों को जिलों की मंडियों की नियमित निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है और उपायुक्तों (डीसी) को जिला स्तर पर खरीद व्यवस्था का प्रभारी बनाया गया है। मंत्री और विधायक भी लगातार मंडियों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने आढ़तियों से भी अपील की कि वे किसी प्रकार की राजनीतिक मंशा से ऊपर उठकर किसानों के हित में सहयोग करें। मुख्यमंत्री ने किसान भाइयों से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही और सुव्यवस्थित ढंग से खरीद कार्य को सफलतापूर्वक संचालित कर रही है तथा सभी फसलों की खरीद सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश में खरीद प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित तथा किसान हितैषी बनाने के लिए कई नई पहलें लागू की हैं। इन उपायों से फसल खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, अनधिकृत गतिविधियों पर रोक लगेगी तथा किसानों को सुविधाजनक और तेज सेवाएं मिलेंगी। 

तकनीक आधारित सत्यापन से बढ़ी पारदर्शिता

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने तीन-स्तरीय फसल सत्यापन प्रणाली को अनिवार्य कर दिया है। इस व्यवस्था के तहत खरीद केंद्रों पर लाई गई फसल का किसान द्वारा पंजीकृत फसल से मिलान सुनिश्चित किया जाएगा। इससे फसल सत्यापन प्रक्रिया अधिक सटीक और विश्वसनीय बनेगी।

उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया में किसान की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। 8 अप्रैल, 2026 तक मंडियों में लाई गई गेहूं का 75 प्रतिशत बायोमेट्रिक सत्यापन सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 3 नामांकित व्यक्तियों को भी बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए अनुमति दी गई है।

जियो-फेंसिंग और गेट पास व्यवस्था से निगरानी मजबूत

मुख्यमंत्री ने बताया कि सभी मंडियों और गोदामों को जियो-फेंसिंग के दायरे में लाया गया है। इससे अनधिकृत उपयोग पर प्रभावी रोक लगेगी और लोकेशन आधारित निगरानी प्रणाली और मजबूत होगी। अब तक 416 गेहूं मंडियों, 112 सरसों मंडियों तथा अधिक आवक की स्थिति से निपटने के लिए 179 अतिरिक्त स्थलों की जियो-फेंसिंग पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा 1,344 भंडारण स्थलों (स्टोरेज प्वाइंट्स) की भी जियो-फेंसिंग की गई है, जिससे खाद्यान्नों का सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित भंडारण सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि मंडियों में माल की ट्रेसबिलिटी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एंट्री गेट पास जारी करते समय वाहन नंबर और वाहन/लोड की फोटो दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। हालांकि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बहुत पुराने या नए वाहनों के मामलों में, जहां वाहन नंबर उपलब्ध नहीं होता, वहां केवल वाहन की फोटो के आधार पर भी गेट पास जारी करने की अनुमति दी गई है।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि मंडी से स्टॉक बाहर ले जाने से पहले एग्जिट गेट पास के लिए ट्रांसपोर्टर और मार्केट कमेटी सचिव दोनों की अनिवार्य स्वीकृति सुनिश्चित की गई है। इस बहु-एजेंसी सत्यापन प्रणाली से स्टॉक की सुरक्षित और प्रमाणित आवाजाही संभव हो रही है। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल, 2026 तक 1,74,635 एग्जिट गेट पास बिना किसी समस्या के जारी किए जा चुके हैं, जो नई व्यवस्था की सफलता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की इन तकनीक-आधारित पहलों से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ी है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है। इस अवसर पर सूचना,जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक  (प्रशासनिक)  श्रीमती वर्षा खांगवाल एवं मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय उपस्थित रहे ।