हरियाणा के स्थानीय चुनावों में नोटा (NOTA) विकल्प के पास अब चुनाव रद्द कराने की क्षमता नहीं
चंडीगढ़- हरियाणा प्रदेश के कुल 7 नगर निकायों ( 3 नगर निगमों, 1 नगरपालिका परिषद एवं 3 नगरपालिका समितियों ) के आम चुनाव एवं आधा दर्जन अन्य निकायों के उपचुनाव हेतू मतदान आगामी 10 मई को होगा जबकि 13 मई को मतगणना होगी.
इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट और म्यूनिसिपल कानून के जानकार हेमंत कुमार ( 9416887788) ने एक रोचक परन्तु महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के सभी निकायों में जहाँ नगर निगम मेयर और नगरपरिषद नगरपालिका अध्यक्ष का प्रत्यक्ष (सीधा) चुनाव एवं उन निकायों के वार्डों में जहाँ से निकाय सदस्य ( जिन्हें आम भाषा में पार्षद कहा जाता है हालांकि पार्षद या कौंसिलर शब्द हरियाणा के दोनों म्युनिसिपल कानूनों में नहीं है) जितने भी उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे, उन सभी के चुनाव में इस बार भी मतदान में ई.वी.एम. ( इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर नोटा विकल्प का प्रयोग तो होगा परंतु अबकी बार नोटा विकल्प के पास चुनाव रद्द कराने की
क्षमता नहीं होगी चूंकि मौजूदा राज्य निर्वाचन आयोग देवेन्द्र सिंह कल्याण द्वारा द्वारा गत 7 अप्रैल को इस संबंध में एक ताजा आदेश जारी कर नवंबर, 2018 में तत्कालीन राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दलीप सिंह द्वारा जारी पिछले आदेश को निरस्त कर दिया है.
इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए हेमंत ने बताया कि साढ़े 7 वर्ष पूर्व नवंबर, 2018 में तत्कालीन राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दलीप सिंह द्वारा जारी आदेश के बाद प्रदेश में नगर निकायों के जितने भी चुनाव कराए गए उनमें मतदान के दौरान प्रयुक्त होने वाली ई.वी.एम. में न केवल नोटा -NOTA (नन ऑफ़ द अबाव- अर्थात (उपरोक्त में से कोई भी नहीं) का बटन/विकल्प दिया जाता रहा बल्कि इसी के साथ आयोग ने उसके द्वारा जारी उपरोक्त आदेश से यह भी व्यवस्था लागू कर रखी थी कि चुनावों में नोटा को एक फिक्शनल इलेक्शन कैंडिडेट (कल्पित चुनावी प्रत्याशी) माना जाएगा एवं उसके पक्ष में पड़ी सभी वोटों को रिकॉर्ड पर लिया जाएगा.
22 नवंबर 2018 को जारी आदेशानुसार ऐसी व्यवस्था प्रदेश में सभी स्थानीय चुनावों पर लागू की गई थी. उपरोक्त व्यवस्था में अगर किसी चुनावी क्षेत्र में (अर्थात नगर निगम / नगरपालिका परिषद/ नगरपालिका समिति के मेयर या अध्यक्ष के सम्बन्ध में पूरे निकाय क्षेत्र में एवं वार्ड सदस्य ( जिन्हें आम लोग पार्षद कहते हैं हालांकि पार्षद शब्द हरियाणा म्युनिसिपल कानून में नहीं है) के सम्बन्ध में प्रासंगिक वार्ड में अगर नोटा के पक्ष में डाले गए वोट एवं किसी प्रत्याशी को डाले गए वोट सर्वाधिक अर्थात शेष उम्मीदवारों को व्यक्तिगत प्राप्त वोटों से अधिक हालांकि दोनों को प्राप्त आपस में बराबर हों, तो ऐसी स्थिति में उस सर्वाधिक वोट लेने वाले प्रत्याशी को (न कि नोटा को) उस चुनावी क्षेत्र से विजयी घोषित कर दिया जाएगा.
परन्तु अगर नोटा के पक्ष में डाले गए वोट उस चुनावी क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों को व्यक्तिगत तौर पर प्राप्त वोटों से अधिक हों, तो उस परिस्थिति में किसी भी प्रत्याशी को उस वार्ड से निर्वाचित घोषित नहीं किया जाएगा एवं संबंधित रिटर्निंग आफिसर द्वारा इस सम्बन्ध में निर्वाचन आयोग को सूचित किया जाएगा एवं आयोग द्वारा उस चुनावी क्षेत्र में वह चुनाव पूर्णतया रद्द कर दोबारा चुनाव करवाया जाएगा जिसमें हालांकि उन सभी पिछले प्रत्याशियों को ताजा चुनाव नहीं लड़ने दिया जाएगा जिन्होंने पिछले चुनाव, जो रद्द कर दिया गया, में मतगणना में नोटा को प्राप्त हुए वोटों से कम वोट प्राप्त किए थे.
इसका सीधा अर्थ यह था कि दोबारा करवाए जाने वाले चुनाव में सभी प्रत्याशी नए ही हो सकते थे एवं पिछले सभी उम्मीदवार उस नगर निकाय क्षेत्र/वार्ड में दोबारा चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माने जाते थे.
हरियाणा निर्वाचन आयोग द्वारा नवंबर, 2018 में जारी आदेश में आगे यह उल्लेख किया गया था कि अगर ताजा चुनाव की मतगणना में भी नोटा के पक्ष में सर्वाधिक वोट पड़ते हैं, तो ऐसी परिस्थिति में तीसरी बार ताजा चुनाव नही कराया जाएगा एवं नोटा के बाद सर्वाधिक वोट हासिल करने वाले दूसरे नंबर के प्रत्याशी को उस चुनाव में विजयी घोषित कर दिया जाएगा.
बहरहाल, अब गत 7 अप्रैल को मौजूदा राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण द्वारा जारी ताजा आदेश अनुसार अगर किसी स्थानीय चुनाव में नोटा विकल्प को सर्वाधिक वोट भी मिलते हैं, तो इसके बावजूद चुनाव रद्द नहीं होगा एवं नोटा के बाद दूसरे नंबर पर सर्वाधिक वोट लेने वाले उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा.
हेमंत ने बताया कि अब से नोटा विकल्प को डाले गये वोटों को चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों द्वारा ज़मानत राशि बचाने के लिए जाने वाले न्यूनतम साढ़े बारह फीसदी वोटों की गणना में भी शामिल नहीं किया जाएगा.
ज्ञात रहे कि सुप्रीम कोर्ट के तीन जज बेंच द्वारा सितम्बर 2013 में दिए गए एक निर्णय – पी.यू.सी.एल. बनाम भारत सरकार में देश की सर्वोच्च अदालत ने चुनावों में नोटा के विकल्प का प्रावधान डालने बारे भारतीय चुनाव आयोग को निर्देश तो दिया था परन्तु उसमें ऐसा कुछ नही था जैसा हरियाणा निर्वाचन आयोग ने नवंबर, 2018 से व्यवस्था लागू कर रखी थी.
हरियाणा के स्थानीय चुनावों में नोटा (NOTA) विकल्प के पास अब चुनाव रद्द कराने की क्षमता नहीं
नवंबर, 2018 में तत्कालीन निर्वाचन आयुक्त डॉ. दलीप सिंह द्वारा जारी आदेश को मौजूदा निर्वाचन राज्य आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण ने किया निरस्त
चंडीगढ़- हरियाणा प्रदेश के कुल 7 नगर निकायों ( 3 नगर निगमों, 1 नगरपालिका परिषद एवं 3 नगरपालिका समितियों ) के आम चुनाव एवं आधा दर्जन अन्य निकायों के उपचुनाव हेतू मतदान आगामी 10 मई को होगा जबकि 13 मई को मतगणना होगी.
इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट और म्यूनिसिपल कानून के जानकार हेमंत कुमार ( 9416887788) ने एक रोचक परन्तु महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के सभी निकायों में जहाँ नगर निगम मेयर और नगरपरिषद नगरपालिका अध्यक्ष का प्रत्यक्ष (सीधा) चुनाव एवं उन निकायों के वार्डों में जहाँ से निकाय सदस्य ( जिन्हें आम भाषा में पार्षद कहा जाता है हालांकि पार्षद या कौंसिलर शब्द हरियाणा के दोनों म्युनिसिपल कानूनों में नहीं है) जितने भी उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे, उन सभी के चुनाव में इस बार भी मतदान में ई.वी.एम. ( इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर नोटा विकल्प का प्रयोग तो होगा परंतु अबकी बार नोटा विकल्प के पास चुनाव रद्द कराने की
क्षमता नहीं होगी चूंकि मौजूदा राज्य निर्वाचन आयोग देवेन्द्र सिंह कल्याण द्वारा द्वारा गत 7 अप्रैल को इस संबंध में एक ताजा आदेश जारी कर नवंबर, 2018 में तत्कालीन राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दलीप सिंह द्वारा जारी पिछले आदेश को निरस्त कर दिया है.
इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए हेमंत ने बताया कि साढ़े 7 वर्ष पूर्व नवंबर, 2018 में तत्कालीन राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दलीप सिंह द्वारा जारी आदेश के बाद प्रदेश में नगर निकायों के जितने भी चुनाव कराए गए उनमें मतदान के दौरान प्रयुक्त होने वाली ई.वी.एम. में न केवल नोटा -NOTA (नन ऑफ़ द अबाव- अर्थात (उपरोक्त में से कोई भी नहीं) का बटन/विकल्प दिया जाता रहा बल्कि इसी के साथ आयोग ने उसके द्वारा जारी उपरोक्त आदेश से यह भी व्यवस्था लागू कर रखी थी कि चुनावों में नोटा को एक फिक्शनल इलेक्शन कैंडिडेट (कल्पित चुनावी प्रत्याशी) माना जाएगा एवं उसके पक्ष में पड़ी सभी वोटों को रिकॉर्ड पर लिया जाएगा.
22 नवंबर 2018 को जारी आदेशानुसार ऐसी व्यवस्था प्रदेश में सभी स्थानीय चुनावों पर लागू की गई थी. उपरोक्त व्यवस्था में अगर किसी चुनावी क्षेत्र में (अर्थात नगर निगम / नगरपालिका परिषद/ नगरपालिका समिति के मेयर या अध्यक्ष के सम्बन्ध में पूरे निकाय क्षेत्र में एवं वार्ड सदस्य ( जिन्हें आम लोग पार्षद कहते हैं हालांकि पार्षद शब्द हरियाणा म्युनिसिपल कानून में नहीं है) के सम्बन्ध में प्रासंगिक वार्ड में अगर नोटा के पक्ष में डाले गए वोट एवं किसी प्रत्याशी को डाले गए वोट सर्वाधिक अर्थात शेष उम्मीदवारों को व्यक्तिगत प्राप्त वोटों से अधिक हालांकि दोनों को प्राप्त आपस में बराबर हों, तो ऐसी स्थिति में उस सर्वाधिक वोट लेने वाले प्रत्याशी को (न कि नोटा को) उस चुनावी क्षेत्र से विजयी घोषित कर दिया जाएगा.
परन्तु अगर नोटा के पक्ष में डाले गए वोट उस चुनावी क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों को व्यक्तिगत तौर पर प्राप्त वोटों से अधिक हों, तो उस परिस्थिति में किसी भी प्रत्याशी को उस वार्ड से निर्वाचित घोषित नहीं किया जाएगा एवं संबंधित रिटर्निंग आफिसर द्वारा इस सम्बन्ध में निर्वाचन आयोग को सूचित किया जाएगा एवं आयोग द्वारा उस चुनावी क्षेत्र में वह चुनाव पूर्णतया रद्द कर दोबारा चुनाव करवाया जाएगा जिसमें हालांकि उन सभी पिछले प्रत्याशियों को ताजा चुनाव नहीं लड़ने दिया जाएगा जिन्होंने पिछले चुनाव, जो रद्द कर दिया गया, में मतगणना में नोटा को प्राप्त हुए वोटों से कम वोट प्राप्त किए थे.
इसका सीधा अर्थ यह था कि दोबारा करवाए जाने वाले चुनाव में सभी प्रत्याशी नए ही हो सकते थे एवं पिछले सभी उम्मीदवार उस नगर निकाय क्षेत्र/वार्ड में दोबारा चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माने जाते थे.
हरियाणा निर्वाचन आयोग द्वारा नवंबर, 2018 में जारी आदेश में आगे यह उल्लेख किया गया था कि अगर ताजा चुनाव की मतगणना में भी नोटा के पक्ष में सर्वाधिक वोट पड़ते हैं, तो ऐसी परिस्थिति में तीसरी बार ताजा चुनाव नही कराया जाएगा एवं नोटा के बाद सर्वाधिक वोट हासिल करने वाले दूसरे नंबर के प्रत्याशी को उस चुनाव में विजयी घोषित कर दिया जाएगा.
बहरहाल, अब गत 7 अप्रैल को मौजूदा राज्य निर्वाचन आयुक्त देवेंद्र सिंह कल्याण द्वारा जारी ताजा आदेश अनुसार अगर किसी स्थानीय चुनाव में नोटा विकल्प को सर्वाधिक वोट भी मिलते हैं, तो इसके बावजूद चुनाव रद्द नहीं होगा एवं नोटा के बाद दूसरे नंबर पर सर्वाधिक वोट लेने वाले उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा.
हेमंत ने बताया कि अब से नोटा विकल्प को डाले गये वोटों को चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों द्वारा ज़मानत राशि बचाने के लिए जाने वाले न्यूनतम साढ़े बारह फीसदी वोटों की गणना में भी शामिल नहीं किया जाएगा.
ज्ञात रहे कि सुप्रीम कोर्ट के तीन जज बेंच द्वारा सितम्बर 2013 में दिए गए एक निर्णय – पी.यू.सी.एल. बनाम भारत सरकार में देश की सर्वोच्च अदालत ने चुनावों में नोटा के विकल्प का प्रावधान डालने बारे भारतीय चुनाव आयोग को निर्देश तो दिया था परन्तु उसमें ऐसा कुछ नही था जैसा हरियाणा निर्वाचन आयोग ने नवंबर, 2018 से व्यवस्था लागू कर रखी थी.
