संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा संपन्न, कृष्ण-सुदामा झांकी ने भाव-विभोर किए श्रद्धालु
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा के दीन-हीन वेश को नहीं, बल्कि उनके हृदय की सच्ची भावना को देखा और उन्हें गले लगाकर मित्रता का आदर्श प्रस्तुत किया। समापन अवसर पर कृष्ण-सुदामा की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने सभी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। झांकी में दोनों मित्रों के मिलन का दृश्य सजीव रूप में दर्शाया गया, जिसे देख श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए। रविवार को मंदिर परिसर में विधि-विधान से हवन यज्ञ का आयोजन किया गया।
श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति डालकर परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात भंडारे का आयोजन कर प्रसाद वितरित किया गया। यह कथा सुंदरकांड भजन-कीर्तन महिला मंडल व डेरा बाबा सरसाई नाथ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। समापन समारोह में महंत श्री सुंदराई नाथ जी महाराज को शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय माहौल बना रहा।
