*हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (हालसा) ने न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य-स्तरीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम किया आयोजित*

 

 

 

चंडीगढ़, 08 अगस्त— हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (हालसा) ने न्याय व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए शनिवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी के सभागार में राज्य-स्तरीय क्षमता सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं हालसा के कार्यकारी अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति दीपक सिबल के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यक्रम हरियाणा के महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया।

 

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों तथा पुलिस अधिकारियों को समकालीन कानूनी प्रावधानों, व्यावहारिक पहलुओं और प्रभावी संस्थागत समन्वय की जानकारी प्रदान करना था, ताकि महिलाओं, बच्चों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों से संबंधित कानूनों का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके और उन्हें समय पर न्याय उपलब्ध करवाया जा सके।

 

राज्यभर से न्यायिक अधिकारियों, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम)-सह-दहेज निषेध अधिकारियों तथा पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में कुल 228 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 85 न्यायिक अधिकारी, 58 एसडीएम-सह-दहेज निषेध अधिकारी तथा 85 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। इतनी व्यापक भागीदारी ने न्याय व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच संस्थागत दक्षता और बेहतर समन्वय के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाया।

 

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने समकालीन कानूनी एवं सामाजिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। इनमें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की अधिवक्ता सुश्री तनु बेदी, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ श्री रक्षित टंडन, चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी के फैकल्टी सदस्य डॉ. गोपाल अरोड़ा, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी डॉ. के.पी. सिंह तथा पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राहुल चक्रवर्ती शामिल रहे।

 

कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराध, मोटर दुर्घटना मुआवजा, बाल संरक्षण कानून, किशोर न्याय, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, दहेज से संबंधित मामले तथा कमजोर वर्गों के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने पीड़ित-केंद्रित न्याय व्यवस्था, प्रभावी जांच, विभिन्न संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल तथा न्याय से जुड़े सभी हितधारकों के निरंतर क्षमता सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

 

हालसा द्वारा राज्यभर में महिलाओं, बच्चों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के हितों से जुड़े विषयों पर इस प्रकार के विशेष प्रशिक्षण एवं क्षमता सुदृढ़ीकरण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य संबंधित संस्थानों की कार्यक्षमता को बढ़ाना, कानूनी जागरूकता को मजबूत करना तथा जरूरतमंद लोगों के लिए न्याय तक पहुंच को और अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाना है।