फसल अवशेष जलाने की बजाय मिट्टी में मिलाएं किसान : डीसी
झज्जर, 06 मई । डीसी स्वप्निल रविन्द्र पाटिल ने कहा कि जिला में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर रोक को लेकर प्रशासन सतर्क है। फसल अवशेषों को जलाने से न केवल पर्यावरण दूषित होता है,साथ ही जमीन की उर्वरा शक्ति भी कमजोर होती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे फील्ड में सक्रिय रहते हुए नियमित मोनिटरिंग करें। डीसी बुधवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की वीसी उपरांत कृषि एवं किसान कल्याण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
बैठक में डीसी ने फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की रोकथाम के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्णतः रोक लगाने के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। किसानों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखते हुए उन्हें जागरूक किया जाए और वैकल्पिक उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि फील्ड में नियमित दौरे सुनिश्चित करें और जहां कहीं भी पराली जलाने की आशंका हो, वहां पहले से ही प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसके अलावा पंचायतों और स्थानीय प्रतिनिधियों को भी इस मुहिम में सक्रिय भागीदारी के लिए जोड़ा जाए।
डीसी ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर वायु गुणवत्ता के लिए फाने जलाने की समस्या का समाधान अत्यंत आवश्यक है। प्रशासन इस दिशा में पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है।
उन्होंने बताया कि जिले में किसानों को गेहूं के फाने न जलाने के लिए लगातार जागरूक किया जाए। साथ ही किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके।
इस अवसर पर जिला परिषद के सीईओ मनीष फोगाट, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आशीष कौशिक,कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एसडीओ डॉ जगजीत सांगवान,डॉ सुनील कौशिक,जसवीर सिंह, कृषि अभियंता डॉ राजीव चावला, एपीपीओ डॉ भैया राम,तकनीकी अधिकारी डॉ रोहित वत्स, एसएमएस डॉ रमेश लांबा, कविता सहित सभी खंडों के कृषि अधिकारी उपस्थित थे।
