दो लाख रुपये की रिश्वत लेते जिला सिंचाई अधिकारी गिरफ्तार, निर्माण कार्य के लिए मांगे थे 5 लाख रुपये

 
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर एक भ्रष्ट अधिकारी को विजिलेंस की टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपी अधिकारी सिंचाई विभाग में कार्यरत है और एक जमीन पर निर्माण कार्य को जारी रखने की एवज में दो लाख रुपये लेते हुए गिरफ्तार हुआ है। आरोपी अधिकारी की पहचान राजेश चौहान के रुप में हुई है।

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर एक भ्रष्ट अधिकारी को विजिलेंस की टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपी अधिकारी सिंचाई विभाग में कार्यरत है और एक जमीन पर निर्माण कार्य को जारी रखने की एवज में दो लाख रुपये लेते हुए गिरफ्तार हुआ है। आरोपी अधिकारी की पहचान राजेश चौहान के रुप में हुई है।


विजिलेंस अधिकारी केवी सिंह ने बताया कि गाजियाबाद के महरौली निवासी शिकायतकर्ता डॉ. प्रदीप गुप्ता की महरौली में 531.71 वर्गगज जमीन है। पीड़ित के पास जमीन के पुख्ता कागजात और दाखिल-खारिज भी मौजूद है। डॉक्टर उक्त जमीन पर निर्माण कार्य करा रहे थे। आरोप है कि बीते 28 फरवरी को जिलेदार राजेश कुमार उर्फ राजेश चौहान ने बिना किसी पूर्व नोटिस के जेसीबी ले जाकर जमीन की बाउंड्रीवॉल गिरवा दी। जिलेदार ने जमीन को सिंचाई विभाग की बताते हुए वहां हो रहे निर्माण को अवैध घोषित कर दिया और काम रुकवा दिया।

जमीन पर दोबारा निर्माण शुरू करने की अनुमति देने के नाम पर जिलेदार ने भ्रष्टाचार का जाल बुना। आरोपी ने किसान भूपेंद्र सिंह के माध्यम से पीड़ित डॉक्टर से 5 लाख रुपये की रकम मांगी। काफी मिन्नतों के बाद सौदा दो लाख रुपये में तय हुआ। परेशान डॉक्टर ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हुए मेरठ विजिलेंस टीम से इसकी लिखित शिकायत कर दी। विजिलेंस अधिकारी केवी सिंह के नेतृत्व में सोमवार को जाल बिछाया गया।


टीम का एक सदस्य किसान का वेश धरकर मौके पर पहुंच गया। जैसे ही डॉ. प्रदीप गुप्ता ने रिश्वत की रकम जिलेदार और उसके सहयोगी किसान भूपेंद्र को थमाई, पहले से घेराबंदी कर चुकी विजिलेंस टीम ने दोनों को दबोच लिया। टीम ने आरोपियों के पास से रिश्वत के रुपये बरामद कर लिए हैं। विजिलेंस की टीम दोनों आरोपियों को लेकर सिकंदराबाद थाने पहुंची, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया की जा रही है।