बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य बना चर्चा का केंद्र, 3 दिवसीय सीआरई कार्यशाला संपन्न
इंडियन एसोसिएशन ऑफ हेल्थ, रिसर्च एंड वेलफेयर (IAHRW) के नेतृत्व में डॉ. सुनील सैनी तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के मनोविज्ञान विभाग एवं पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स (PGGCG), सेक्टर-11, चंडीगढ़ के सहयोग से बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समकालीन चुनौतियों पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सीआरई कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला के दूसरे दिन हरियाणा सरकार के विशेष सचिव, कार्यालय मुख्य सचिव, डॉ. मुनीश नागपाल, आई. ए. एस., ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यशाला में आठ राज्यों के कॉलेजों, विश्वविद्यालयों एवं विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से 220 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, स्वास्थ्यकर्मी, शिक्षाविद् एवं विद्यार्थी शामिल रहे।
डॉ. नागपाल ने अपने संबोधन में पारंपरिक पारिवारिक व्यवस्था से वर्तमान डिजिटल युग तक आए बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक ने शिक्षा, संवाद एवं विकास के नए अवसर प्रदान किए हैं, लेकिन अत्यधिक स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया की लत तथा व्यवहार एवं मनोवैज्ञानिक समस्याएं बच्चों और किशोरों के लिए नई चुनौतियां बनकर उभरी हैं।
कार्यशाला में 12 प्रतिष्ठित विशेषज्ञों द्वारा 11 अकादमिक सत्र आयोजित किए गए। इनमें पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, जीएमसीएच-32, फोर्टिस अस्पताल, सर गंगाराम अस्पताल और एमिटी विश्वविद्यालय सहित प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल रहे। सत्रों में जागरूकता, समय रहते पहचान, पेशेवर हस्तक्षेप तथा सामूहिक प्रयासों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
