बिना कोचिंग क्रैक की 70वीं BPSC परीक्षा, 2549वीं रैंक हासिल कर मजदूर की बेटी बनीं स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर 

 
बिना कोचिंग क्रैक की 70वीं BPSC परीक्षा, 2549वीं रैंक हासिल कर मजदूर की बेटी बनीं स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर 

State Tax Assistant Commissioner Sundari : बक्सर के बनारपुर गांव की सुंदरी कुमारी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। उनके पिता एक मज़दूर हैं और परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, फिर भी सुंदरी ने बिना किसी कोचिंग के 70वीं BPSC परीक्षा पास कर ली और अब वह 'स्टेट टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर' बन गई हैं। 

70वीं BPSC परीक्षा में 2549वीं रैंक हासिल की

बक्सर ज़िले के चौसा ब्लॉक के बनारपुर गांव की रहने वाली सुंदरी कुमारी ने 70वीं BPSC परीक्षा में 2549वीं रैंक हासिल की है। बिना किसी कोचिंग क्लास की मदद के मिली इस सफलता से पूरा गांव बेहद खुश है। 

बिना कोचिंग क्रैक की 70वीं BPSC परीक्षा

मजदूर पिता की बेटी 

सुंदरी बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं; उनके पिता, अनिल राम, मज़दूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। इन आर्थिक मुश्किलों के बावजूद, सुंदरी का हौसला कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने घर से ही अपनी पढ़ाई और तैयारी शुरू की। 

गांव के ही हाई स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की

उन्होंने गांव के ही हाई स्कूल से मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की और बाद में बक्सर के महर्षि विश्वामित्र कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। बचपन से ही उनका सपना एक अधिकारी बनने का था।

बिना कोचिंग क्रैक की 70वीं BPSC परीक्षा

असफलता से नहीं मानी हार

हालांकि, वह अपने पहले प्रयास में 'मेन्स' परीक्षा पास नहीं कर पाईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना, उन्हें सुधारने के लिए काम किया और दोगुनी मेहनत के साथ फिर से तैयारी शुरू कर दी। 

बिना कोचिंग क्रैक की 70वीं BPSC परीक्षा

गांव की सभी युवतियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा

अपने दूसरे प्रयास में, उन्होंने सफलतापूर्वक 'प्रिलिमिनरी टेस्ट' (PT) पास कर लिया। इसके बाद, 'मेन्स' परीक्षा की बेहतर तैयारी के लिए वह पटना चली गईं। वहां उन्होंने कड़ी मेहनत की और आखिरकार अपने लक्ष्य तक पहुंच गईं। सुंदरी का मानना ​​है कि कड़ी मेहनत और लगन कभी बेकार नहीं जाती; आत्मविश्वास के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। जब से नतीजे घोषित हुए हैं, गांव वाले और शुभचिंतक उन्हें बधाई देने के लिए पहुंच रहे हैं। सुंदरी अब अपने गांव की सभी युवतियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई हैं।