छोटे से गांव की बेटी बनी एयरफोर्स ऑफिसर, देश भर में CDS में हासिल हुई चौथी रैंक 

 
छोटे से गांव की बेटी बनी एयरफोर्स ऑफिसर, देश भर में CDS में हासिल हुई चौथी रैंक 

Manisha Singh officer in the Indian Air Force : आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अपनी कड़ी मेहनत, लगन और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर वे सफलता की नई कहानियां लिख रही हैं। भोजपुर जिले के बरहारा ब्लॉक के नाथमालपुर गांव की रहने वाली मनीषा सिंह का चयन भारतीय वायु सेना में अधिकारी के पद पर हुआ है। उन्होंने कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) परीक्षा में ऑल-इंडिया चौथी रैंक और एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) में 18वीं रैंक हासिल कर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया है।

पिता भारतीय सेना में थे हवलदार
मनीषा के पिता अरविंद सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हवलदार हैं, जबकि उनकी मां उमा सिंह एक गृहिणी हैं। सेना के अनुशासित माहौल में पली-बढ़ीं मनीषा बचपन से ही अपने पिता की वर्दी से काफी प्रेरित थीं। अपने पिता को देश की सेवा करते देख, उन्होंने भी देश की रक्षा के लिए एक अधिकारी बनने का सपना देखा। इस सपने को सच करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और अपने पहले ही प्रयास में बड़ी सफलता हासिल की। ​​उनकी मां ने बताया कि मनीषा ने अपनी स्कूली शिक्षा (शुरुआती वर्षों से लेकर 12वीं कक्षा तक) दानापुर के आर्मी स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्री राम कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ, उन्होंने डिफेंस सर्विसेज में अधिकारी बनने की तैयारी भी शुरू कर दी थी।

हर दिन 10 से 12 घंटे पढ़ाई 
उन्होंने अपनी पढ़ाई और सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू की तैयारी के लिए रोजाना 10 से 12 घंटे का समय दिया। उनकी कड़ी मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण की बदौलत उन्होंने CDS परीक्षा में ऑल-इंडिया चौथी रैंक और AFCAT में 18वीं रैंक हासिल की। ​​मनीषा ने अपने पहले ही प्रयास में यह सफलता प्राप्त की। उनकी इस कामयाबी से न केवल उनके परिवार में, बल्कि उनके गांव और पूरे बरहारा ब्लॉक में खुशी की लहर है। मनीषा के चाचा बालू सिंह (जिन्हें दिनेश सिंह के नाम से भी जाना जाता है) ने बताया कि भले ही मनीषा ने अपनी पढ़ाई शहर में पूरी की, लेकिन उनका अपने गांव से हमेशा गहरा जुड़ाव रहा है। उसकी छोटी बहन और छोटा भाई भी रक्षा सेवाओं में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। मनीषा की यह उपलब्धि उस इलाके की अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है।