जन्म लेते ही पिता ने बेटी से मोड़ लिया मुंह, UPSC में लगातार 3 बार फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार, चौथे प्रयास में बनीं IRS अफसर
IRS Kritika : जीवन में, एक छोटी सी सफलता भी इंसान को उसकी अपनी ताकत का एहसास करा सकती है। कर्नाटक के हासन की रहने वाली कृतिका की कहानी इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। बचपन में पिता का प्यार न मिलने के कारण, उसने कुछ बड़ा हासिल करने की ठान ली। UPSC परीक्षा पास करने में उसे चार साल लग गए, लेकिन सफलता मिलने तक उसने हार नहीं मानी।
जन्म के समय पिता नहीं थे खुश
कृतिका के जन्म के समय उसके पिता खुश नहीं थे। पिता के प्यार के लिए तरसती कृतिका ने स्कूल में हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया और कई पुरस्कार व सम्मान हासिल किए। फिर भी, उसे अपने पिता से कभी वह प्रोत्साहन या प्यार नहीं मिला जिसकी उसे चाहत थी। समय के साथ, इसका असर उसके आत्मविश्वास पर पड़ने लगा।
आखिरकार, उसके माता-पिता अलग हो गए और कृतिका की जिंदगी और भी मुश्किल हो गई। उसकी माँ ने उसे पालने की जिम्मेदारी उठाई, और इस दौरान उन्हें हर कदम पर समाज की तीखी बातें सुननी पड़ीं। यह सब देखकर, जैसे-जैसे कृतिका बड़ी हुई, उसका आत्मविश्वास काफी डगमगाने लगा।
चौथी कक्षा में 100 में से 99 अंक मिलने से जगा खुद पर भरोसा
उसकी जिंदगी में एक अहम मोड़ तब आया जब उसे चौथी कक्षा में 100 में से 99 अंक मिले। पहली बार, उसे खुद पर भरोसा होने लगा एक ऐसा भरोसा जो आगे चलकर उसकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। 2019 में, अपने चौथे प्रयास में, उसने सिविल सेवा परीक्षा पास की और 100वीं ऑल इंडिया रैंक (AIR) हासिल की।
12वीं कक्षा के बाद सिविल सेवा में जाने का फैसला
स्कूल के दिनों में ही कृतिका ने तय कर लिया था कि वह सिविल सेवा में जाना चाहती है। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद, उसने अपने इस लक्ष्य की दिशा में काम करना शुरू कर दिया। ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद, उसने UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) की तैयारी शुरू कर दी।
हालाँकि, यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। तैयारी के दौरान, उसे शादी के प्रस्ताव भी मिलने लगे। एक तलाकशुदा माँ की बेटी होने के नाते, उस पर शादी करने का दबाव भी था। इसके बावजूद, कृतिका ने अपनी तैयारी जारी रखी और अपने लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित रही।
पहले ही प्रयास में प्रीलिम्स में असफलता
कृतिका को अपने UPSC सफर की शुरुआत में ही निराशा का सामना करना पड़ा। वह अपने पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा यानी 'प्रीलिम्स' भी पास नहीं कर सकीं। लगातार कड़ी मेहनत के बावजूद सफलता न मिलने से उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगा था।
हालांकि उन्हें अपनी कोचिंग क्लास से लेकर मॉक इंटरव्यू तक कई जगहों पर तारीफ मिली, लेकिन असल परीक्षाओं में बार-बार मिली असफलता ने उन्हें परेशान कर दिया। वह यह समझ नहीं पा रही थीं कि इतनी अच्छी तैयारी के बावजूद नतीजे उनके पक्ष में क्यों नहीं आ रहे हैं।
प्रीलिम्स के ठीक अगले दिन से फिर से तैयारी शुरू करना
असफलताएं मिलने के बावजूद कृतिका ने हार नहीं मानी। उन्होंने हर प्रयास से कुछ न कुछ सीखने का संकल्प लिया। असल में, प्रीलिम्स देने के ठीक अगले दिन से ही वह अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर देती थीं। उन्होंने अपनी पढ़ाई को सबसे ज्यादा अहमियत दी; तैयारी के पूरे समय के दौरान वह दोस्तों से मेल-जोल और सोशल मीडिया से दूर रहीं।
आखिरकार, उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई। 2019 में, अपने चौथे प्रयास में, कृतिका ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल-इंडिया रैंक 100 हासिल की। उनके लिए, यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह खुद पर अपना भरोसा फिर से कायम करने का एक सफर भी था।
एक छोटी सी सफलता भी हौसला बढ़ा सकती है
कृतिका की सफलता की कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी एक छोटी सी उपलब्धि भी आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरणा दे सकती है। UPSC जैसी कठिन परीक्षा में भले ही असफलता का सामना करना पड़े, लेकिन अपनी गलतियों से सीखना और अपनी तैयारी जारी रखना बहुत जरूरी है।
