यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार
बचाव पक्ष की दलील नहीं आई काम
सुनवाई के दौरान ज्योति मल्होत्रा की ओर से कहा गया कि उन्हें 16 मई 2025 से हिरासत में रखा गया है और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सभी बातें उनके बचाव का हिस्सा हैं और इन पर ट्रायल के दौरान विचार किया जाएगा। अदालत ने यह भी नोट किया कि उनके पाकिस्तान जाने और वहां सरकारी अधिकारियों से मिलने के आरोप लगे हैं। ऐसे में जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
क्या हैं आरोप?
हिसार निवासी ज्योति मल्होत्रा "ट्रैवल विद जो" नाम से यूट्यूब चैनल चलाती थीं। हरियाणा पुलिस का आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों के साथ संवेदनशील सूचनाएं साझा कीं। उनके खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है।
पाकिस्तानी अधिकारी से संपर्क का आरोप
पुलिस के अनुसार, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां ज्योति मल्होत्रा को अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रही थीं। जांच एजेंसियों का दावा है कि नवंबर 2023 से उनका संपर्क एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से था, जो पाकिस्तान उच्चायोग में कर्मचारी था। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने मई 2025 में दानिश को "अवांछित व्यक्ति" (पर्सोना नॉन ग्राटा) घोषित कर देश छोड़ने का आदेश दिया था।
सोशल मीडिया के जरिए होती थी बातचीत
पुलिस का आरोप है कि ज्योति मल्होत्रा विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से पाकिस्तान स्थित लोगों के संपर्क में थीं। जांच में यह भी दावा किया गया है कि वह बातचीत के बाद चैट डिलीट कर देती थीं और रणनीतिक ठिकानों तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े वीडियो भी साझा करती थीं।
हाईकोर्ट ने भी माना था प्रथम दृष्टया मामला
इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से प्रथम दृष्टया मामला बनता है। अदालत ने माना था कि आरोपों की गंभीरता और कथित गतिविधियों की प्रकृति को देखते हुए आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। फिलहाल ज्योति मल्होत्रा न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की सुनवाई जारी है।
