विनेश फोगाट मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा WFI, एशियन गेम्स ट्रायल पर विवाद
WFI की याचिका पर जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच सुनवाई करेगी। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आगे खिलाड़ियों के चयन नियमों और लंबे ब्रेक के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ियों के लिए बड़ा असर डाल सकता है।
मातृत्व अवकाश के बाद विनेश फोगाट को उचित मौका मिले
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 22 मई को विनेश फोगाट के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि WFI की चयन नीति ऐसी है, जिसमें किसी खिलाड़ी की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखने की गुंजाइश नहीं है। हाईकोर्ट ने माना कि विनेश मातृत्व अवकाश के बाद वापसी कर रही हैं और उन्हें खुद को साबित करने का उचित मौका मिलना चाहिए।
कोर्ट ने विनेश को “आइकॉनिक एथलीट” बताते हुए कहा था कि उन्हें एशियन गेम्स ट्रायल में हिस्सा लेने दिया जाए। इसके साथ ही WFI को निर्देश दिया गया था कि 30 और 31 मई को होने वाले ट्रायल की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए ताकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि ट्रायल के दौरान भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के स्वतंत्र पर्यवेक्षक मौजूद रहें।
WFI ने हाईकोर्ट के फैसले पर जताई आपत्ति
हालांकि, WFI ने हाईकोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई है। महासंघ का कहना है कि टीम चयन तय नियमों और मानकों के आधार पर होना चाहिए। अगर किसी खिलाड़ी को विशेष छूट दी जाती है तो इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और एकरूपता प्रभावित हो सकती है। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, क्योंकि यह फैसला सिर्फ विनेश फोगाट ही नहीं बल्कि भविष्य में वापसी करने वाले कई खिलाड़ियों के लिए भी अहम माना जा रहा है।
