हरियाणा में हजारों शिक्षकों के पद खाली होने का दावा, सम्पत सिंह बोले- सार्वजनिक शिक्षा हो रही कमजोर
इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व वित्त मंत्री प्रो. सम्पत सिंह ने सोमवार को चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर हरियाणा की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार एक साजिश के तहत प्रदेश की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को लगातार कमजोर कर रही है, जिसके चलते गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में जाना पड़ रहा है। प्रशासनिक लापरवाही, शिक्षकों की भर्ती पर रोक और शिक्षा के बजट में लगातार कमी ने स्कूल व उच्च शिक्षा व्यवस्था को बदहाल कर दिया है। भर्ती रोको गैंग का हवाला देकर सरकार विपक्ष को जिम्मेदार बताती है। भर्ती रोको गैंग सरकार के ही इशारे पर काम करता है। एएमओ की भर्ती का परिणाम हाई कोर्ट के निर्देश पर चौथी बार बदला गया। कोर्ट में चयन प्रक्रिया में भारी कमियां सामने आई। बार-बार नियमों में बदलाव कर के सरकार खुद भर्तियां को रोकने के काम में जुटी रही। आज प्रदेश की जनता भाजपा शासन से बेहद दुखी है। साल 2024 के विधानसभा चुनाव में जनता बीजेपी से छुटकारा चाहती थी। कांग्रेस के समर्पण के चलते बीजेपी को तीसरी बार सत्ता हासिल करने का मौका मिला। कांग्रेस के लोगों ने जेल जाने के डर से पूर्ण रूप से आत्मसमर्पण कर दिया।
इस दौरान प्रदेश प्रवक्ता डॉ. सतबीर सैनी और कार्यालय सचिव नछत्तर सिंह मलहान उनके साथ मौजूद रहे। प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में लगभग 5000 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को या तो बंद कर दिया या फिर दूसरे स्कूलों में मिला दिया गया, जिसके कारण सैकड़ों स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 10 से कम रह गई और एक हजार से अधिक स्कूलों में केवल एक-एक शिक्षक रह गया है। लगभग 6000 प्री-प्राइमरी सरकारी स्मार्ट प्ले-वे स्कूलों को चैपालों तथा वृद्धाश्रमों में चलाया जा रहा है। इनमें न तो पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं हैं और न ही प्रशिक्षित शिक्षक है। 2014 से प्राथमिक व अन्य शिक्षकों की नियमित भर्ती लगभग ठप रही है और बाद में सरकार अपने ही कुप्रबंधन के कारण विद्यार्थियों की घटती संख्या का हवाला देकर शिक्षकों को सरप्लस घोषित करने लगी। माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर प्रदेश में 1,22,000 से ज्यादा अध्यापकों के पद मंजूर हैं। उनमें से लगभग 34 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली हैं, जिनकी संख्या 40,971 है। शिक्षकों को उन्हें पढ़ाने के बजाय बीएलओ जैसी गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां दी जा रही है जिससे सरकारी शिक्षा प्रभावित होती है। उच्च शिक्षा की स्थिति भी चिंताजनक है। हरियाणा के 186 सरकारी महाविद्यालय गंभीर संस्थागत संकट से गुजर रहे हैं।
लगभग 60 प्रतिशत सहायक प्रोफेसर के पद खाली पड़े हैं। अनेकों कॉलेजों का संचालन जर्जर भवनों, मंदिरों के कमरों और टीन शेडों में हो रहा है। सरकारी कॉलेजों में विद्यार्थियों का दाखिला मात्र 29 प्रतिशत रह गया है। कुछ महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या एक अंक तक सीमित रह गई है। 53 कॉलेजों में 50 से कम बच्चे दाखिल हुए है। आज हरियाणा में 186 सरकारी कॉलेज हैं। इन कॉलेज में लेक्चरर के 8137 कुल मंजूर पद हैं। लेकिन आज 60 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। मात्र 3303 लेक्चरर ही सरकारी है। कॉलेज दाखिला के आंकड़ों में भी सरकार की कमी साफ दिख रही है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 के दौरान सरकार ने सरकारी कॉलेज में 2,30,491 सीटों पर दाखिले का लक्ष्य रखा था। लेकिन 1,27,901 सीटें ही भर पाई। चालू शिक्षा सत्र में सरकार ने दाखिला सीटों को घटकर 1,11,776 कर दिया। इनमें से मात्र 32,633 सीटों पर ही दाखिले हुए।
प्रो. सम्पत सिंह ने शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के लिए सरकार की घटती वित्तीय प्राथमिकता को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि 2013-14 में राज्य के बजट का 13.37 प्रतिशत से घटकर अब मात्र 8.15 प्रतिशत रह गया है। राष्ट्रीय साक्षरता के मामले में प्रदेश 20वें स्थान पर पहुंच गया है। शिक्षा के बजट में कटौती वास्तव में प्रदेश की आने वाली पीढिय़ों के भविष्य से कटौती है। उन्होंने सरकार को सलाह देते हुए कहा कि शिक्षा को बचाने के लिए सभी स्तर पर स्कूलों व कालेजों का संस्थागत ढांचा मजबूत किया जाए। अध्यापकों और प्राध्यापकों के पद भरने के लिए बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान चलाया जाएं। शिक्षा का बजट कुल बजट का 15 प्रतिशत जरूर हो।
