हरियाणा में शिक्षकों की नई ट्रांसफर पॉलिसी में नहीं होगा बदलाव, शिक्षा विभाग ने खारिज की आपत्तियां

 
  हरियाणा में शिक्षकों की नई ट्रांसफर पॉलिसी में नहीं होगा बदलाव, शिक्षा विभाग ने खारिज की आपत्तियां

 

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की नई स्थानांतरण नीति को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि नई पॉलिसी में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। पदोन्नति पा चुके शिक्षकों का प्राथमिक शिक्षक (JBT) पद का पुराना सेवा अनुभव TGT और PGT काडर की ट्रांसफर मेरिट में नहीं जुड़ेगा।

विभाग का रुख: ट्रांसफर कोई कानूनी अधिकार नहीं
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ट्रांसफर सरकारी सेवा की एक सामान्य प्रक्रिया है। किसी भी कर्मचारी को मनपसंद स्टेशन पर तैनाती पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। जेबीटी और टीजीटी/पीजीटी अलग-अलग काडर हैं, इसलिए पदोन्नति के बाद संबंधित काडर में की गई वास्तविक सेवा को ही मेरिट में शामिल करना तर्कसंगत है। इससे पदोन्नत और सीधी भर्ती से आए शिक्षकों के बीच समानता बनी रहेगी।

क्या था पूरा मामला?
 * 25 जून को जारी नई नीति के खिलाफ सुधीर गहलावत सहित 177 शिक्षकों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
 * याचिकाकर्ताओं ने नीति के क्लॉज-4 और क्लॉज-6 को रद्द करने या संशोधन की मांग की थी।

 * हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को राज्य सरकार को शिक्षकों के ज्ञापनों पर 2 सप्ताह में कारण सहित फैसला लेने का निर्देश दिया था।
 * माध्यमिक शिक्षा महानिदेशक जितेंद्र कुमार द्वारा समीक्षा के बाद शिक्षकों की आपत्तियों को खारिज कर दिया गया।

नई नीति में मेरिट का बदला स्वरूप:
 * उम्र के अंक: पहले 50 अंक थे, जिसे घटाकर अब 30 अंक कर दिया गया है।
 * काडर अनुभव: इसके लिए 30 अंक निर्धारित किए गए हैं।
 * विशेष परिस्थितियां: इसके लिए 60 अंक तय किए गए हैं, जिसमें गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, महिला कर्मचारी और दंपति (कपल केस) मामले शामिल हैं।
विभाग ने यह भी उल्लेख किया कि हाईकोर्ट पहले भी शीला बनाम हरियाणा राज्य और संजीव कुमार बनाम हरियाणा राज्य जैसे मामलों में ऐसी याचिकाएं खारिज कर चुका है।