12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ वृद्ध अवस्था के लिए योग’, आयुष विभाग ने बताए नियमित योग के लाभ


 
12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ वृद्ध अवस्था के लिए योग’, आयुष विभाग ने बताए नियमित योग के लाभ*

गुरुग्राम, 10 जून- बढ़ती आयु के साथ शरीर और मन दोनों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे में योग एक ऐसा सरल और प्रभावी माध्यम है, जो वृद्धजनों को स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ वृद्ध अवस्था के लिए योग” भी इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।

डा. भूदेव, जिला योग विशेषज्ञ, आयुष विभाग, गुरुग्राम ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में अधिकांश वृद्धजन अनिद्रा, जोड़ों के दर्द, शरीर में जकड़न, कमर दर्द, कब्ज, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कमजोरी जैसी समस्याओं से प्रभावित रहते हैं। नियमित योगाभ्यास इन समस्याओं को नियंत्रित करने के साथ-साथ शरीर की कार्यक्षमता बनाए रखने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होता है।

उन्होंने बताया कि वृद्धजन प्रतिदिन लगभग 40 मिनट योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। इसमें 20 मिनट सूक्ष्म व्यायाम और योगासन तथा 20 मिनट प्राणायाम शामिल किया जा सकता है। नियमित अभ्यास से शरीर में लचीलापन बना रहता है, रक्त संचार बेहतर होता है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है।

डा. भूदेव ने बताया कि गर्दन और कंधों के सूक्ष्म व्यायाम वृद्धजनों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं। इन सरल अभ्यासों से गर्दन और कंधों की जकड़न कम होती है, सिरदर्द और तनाव में राहत मिलती है तथा अच्छी नींद आने में सहायता मिलती है। इनका अभ्यास बैठकर या खड़े होकर आसानी से किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ताड़ासन और भुजंगासन जैसे योगासन वृद्धावस्था में शरीर को मजबूत और संतुलित बनाए रखने में सहायक होते हैं। ताड़ासन शरीर के संतुलन, खिंचाव और लचीलेपन को बढ़ाता है, जबकि भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने, छाती का विस्तार करने और श्वसन क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है। इन योगासनों का नियमित अभ्यास कमर दर्द और शरीर की अकड़न को कम करने में भी उपयोगी है।

प्राणायाम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि अनुलोम-विलोम प्राणायाम वृद्धजनों के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसके नियमित अभ्यास से फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है, तनाव और चिंता कम होती है तथा मन को शांति और स्थिरता प्राप्त होती है। यह अभ्यास शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायक होता है।

डा. भूदेव ने कहा कि योग के साथ-साथ संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या भी स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए आवश्यक है। उन्होंने सलाह दी कि वृद्धजन रात्रि भोजन शाम 8 बजे से पहले कर लें तथा भोजन हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक रखें। पतली दाल, खिचड़ी तथा सीमित मात्रा में घी युक्त खाद्य पदार्थ पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखने में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर सोना और पर्याप्त विश्राम लेना भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है। यदि वृद्धजन नियमित रूप से योग, प्राणायाम और ध्यान को अपनाएं तो वे लंबे समय तक स्वस्थ, ऊर्जावान और आत्मनिर्भर जीवन व्यतीत कर सकते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लें।