न्याय का आधार धर्म, सत्य और विवेक है, केवल कानून नहीं: गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज

 
 न्याय का आधार धर्म, सत्य और विवेक है, केवल कानून नहीं: गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज

भिवानी, 18 जुलाई। न्याय तभी सार्थक होता है, जब उसका आधार धर्म, सत्य और विवेक हो। न्याय केवल कानून की धाराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्तव्य, निष्पक्षता और मानवीय मूल्यों से भी उसका गहरा संबंध है। यह विचार गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने भिवानी के बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित न्यायक्षेत्र में गीता जी की प्रासंगिकता" विषयक कार्यक्रम में व्यक्त किए।
उन्होंने अधिवक्ताओं एवं न्यायविदों को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन, कर्तव्य और न्याय का सर्वोच्च मार्गदर्शक है। गीता का सबसे अधिक महत्व न्यायालयों में है, क्योंकि यहां सत्य, निष्पक्षता और धर्म के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को निष्काम कर्म, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया, जो आज भी न्याय व्यवस्था के लिए समान रूप से प्रासंगिक है।
ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि अधिवक्ता केवल अपने मुवक्किल का पक्ष रखने तक सीमित न रहें, बल्कि न्याय की स्थापना और सत्य की रक्षा को भी अपना सर्वोच्च दायित्व मानें। जब कानून के साथ नैतिकता और आध्यात्मिक मूल्यों का समन्वय होता है, तभी समाज में वास्तविक न्याय स्थापित होता है।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिवक्ताओं, न्यायविदों एवं गणमान्य नागरिकों ने भी गीता के शाश्वत सिद्धांतों पर अपने विचार साझा किए और कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता के आदर्श आज की न्यायिक व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, निष्पक्ष और जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अधिवक्ता एवं बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप तंवर,ने गीता के संदेशों को अपने व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि न्याय व्यवस्था में सत्य, धर्म और सचिव विनोद भारद्वाज ने कहा कि कर्तव्य की भावना को सुदृढ़ करने के लिए ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण कृपा परिवार व जीओ गीता से जुड़े डॉक्टर विनोद अंचल ने स्वामी जी के पद चरण बार एसोसिएशन में रखवा अभी अधिवक्ताओं को धन्य कर दिया, जिनके प्रयास से अधिवक्ता गीता का अमृत पान कर सके।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट संदीप तंवर, सचिव विनोद भारद्वाज, अधिवक्ता सुरेंद्र हंस, एडवोकेट बी बी जैन, एडवोकेट अविनाश सरदाना, एडवोकेट जोगेन्द्र तंवर, एडवोकेट युधिष्ठिर वत्स, एडवोकेट देवेंद्र तंवर, एडवोकेट मुकेश चौहान, डॉक्टर विनोद अंचल,ओपी नंदवानी, खुशहाल ग्रोवर, चंद्र प्रकाश डेरी वाला, विनोद छाबड़ा , आत्म प्रकाश टुटेजा, अशोक कुमार भारद्वाज सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।