हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी बड़ी चुनौती, 15 हजार पद खाली
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि हरियाणा में 1066 ऐसे सरकारी स्कूल हैं जहां केवल एक शिक्षक पूरे स्कूल की जिम्मेदारी संभाल रहा है। इन स्कूलों में 43 हजार से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एक शिक्षक के लिए कई विषयों और अलग-अलग कक्षाओं को संभालना बेहद मुश्किल होता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
हालांकि सकारात्मक पहल यह रहा कि हरियाणा में शून्य नामांकन वाले स्कूल नहीं मिले। इसका अर्थ है कि सभी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थी मौजूद हैं और शिक्षा व्यवस्था सक्रिय बनी हुई है। इसके बावजूद शिक्षकों की कमी को लेकर अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।
हरियाणा के सामने प्रमुख चुनौतियां
चुनौती — आंकड़े — प्रभाव
प्राथमिक स्तर पर शिक्षक रिक्तियां — 7,626 — पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका
माध्यमिक स्तर पर रिक्तियां — 4,070 — विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी
सिनियर सेकेंडरी रिक्तियां — 3,847 — उच्च कक्षाओं में दबाव
सिंगल टीचर स्कूल — 1,066 — एक शिक्षक पर पूरा स्कूल निर्भर
सिंगल टीचर स्कूलों में छात्र संख्या — 43,400 — गुणवत्तापूर्ण शिक्षा चुनौती
हायर सेकेंडरी स्कूल (1-12) — केवल 4 — उच्च शिक्षा तक पहुंच सीमित।
शिक्षकों को नई तकनीक सिखाने का दिया सुझाव
रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य में शिक्षक-छात्र अनुपात औसतन बेहतर दिखता है, पर जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। कई ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में विज्ञान, गणित व अंग्रेजी जैसे विषयों के शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इससे बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। नीति आयोग ने सुझाव दिया कि राज्यों को नियमित भर्ती प्रक्रिया तेज करनी चाहिए और खाली पदों को जल्द भरना चाहिए।
शिक्षकों की कमी दूर करना सबसे बड़ी प्राथमिकता
हरियाणा अध्ययन केंद्र के पूर्व निदेशक डा. एसएस चाहर का मानना है कि हरियाणा ने स्कूल भवन, शौचालय और शिक्षा तक पहुंच जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार किया है, लेकिन यदि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करनी है तो शिक्षकों की कमी दूर करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बनानी होगी।
