Rohtak News: हथकरघा विरासत आत्मनिर्भरता की पहचान, पारंपरिक बुनाई से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर : वीरेंद्र बड़खालसा

 राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बोहर में रेजा परिधानों की प्रदर्शनी का उद्घाटन, हथकरघे पर बुनाई व चरखे पर रेजा कताई का लिया अनुभव, ग्रामीण उद्यमिता और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने पर दिया जोर
 
Rohtak News: हथकरघा विरासत आत्मनिर्भरता की पहचान, पारंपरिक बुनाई से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर : वीरेंद्र बड़खालसा

 

रोहतक, 8 अगस्त। मुख्यमंत्री के ओएसडी  वीरेंद्र सिंह बड़खालसा ने कहा कि भारत की पारंपरिक बुनाई और हथकरघा कला हमारी सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत और ग्रामीण रोजगार का मजबूत आधार है। लुप्त होती पारंपरिक बुनाई एवं हस्तकला को पुनर्जीवित कर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर हथकरघा क्षेत्र को आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार से जोड़ने का आह्वान किया है।

 वे गांव बोहर स्थित जुगल भवन में अंतरराष्ट्रीय फैशन डिजाइनर श्रीमती ललिता चौधरी द्वारा समर्थ योजना के तहत केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय के माध्यम से बुनकर सेवा केंद्र, पानीपत द्वारा आयोजित रेजा से तैयार परिधानों की प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। आगामी 28 अगस्त को गुरुग्राम में आयोजित होने वाले उद्यमिता कार्यक्रम में प्रदेश के युवा उद्यमियों को अपने नवाचार एवं व्यावसायिक विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी किसानों को कपास की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। कपास उत्पादन बढ़ने से किसानों की आय के साथ स्वदेशी उत्पादन को भी मजबूती मिलेगी। वीरेंद्र बड़खालसा ने प्रदर्शनी की आयोजक श्रीमती ललिता चौधरी तथा वार्ड-10 की पार्षद श्रीमती मनीषा सुमित नांदल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन पारंपरिक कला, बुनकरों और स्थानीय कारीगरों को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण हैं। प्रदर्शनी के दौरान  बड़खालसा ने स्वयं हथकरघे पर बुनाई की प्रक्रिया सीखी तथा पारंपरिक चरखे पर रेजा की कताई का अनुभव लिया। उन्होंने प्राकृतिक रेशों से तैयार वस्त्रों की विशेषताओं की जानकारी लेते हुए कहा कि ये वस्त्र पर्यावरण-अनुकूल होने के साथ गर्म मौसम में आरामदायक होते हैं।

इस अवसर पर अंशु नांदल द्वारा पुरानी घरेलू एवं पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका मुख्य अतिथि ने अवलोकन किया और इसे सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की सराहनीय पहल बताया। कार्यक्रम में विशेषज्ञ बुनकर सुनील कुमार, नीता सिंह, पद्मश्री महावीर गुड्डू, जाट शिक्षण संस्था के पूर्व प्रधान राज सिंह नांदल, पार्षद मनीषा सुमित नांदल, ब्लॉक समिति चेयरमैन खुशीराम हुड्डा, भाजपा युवा नेता संचित नांदल, मदीना की सरपंच अनीशा संदीप दांगी सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इस दौरान विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

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