गुरुग्राम में बिगड़ा बेटियों का संतुलन! घटते लिंगानुपात पर प्रशासन सख्त, अवैध भ्रूण जांच करने वालों पर कसा शिकंजा

 गुरुग्राम : हरियाणा के गुरुग्राम जिले में लगातार गिरते लिंगानुपात ने प्रशासन की चिंता को बेहद गंभीर बना दिया है। बेटियों की घटती संख्या अब सिर्फ आंकड़ों का मामला नहीं रह गई, बल्कि इसे सामाजिक संतुलन और महिला सुरक्षा से जुड़ा बड़ा संकट माना जा रहा है। यही वजह है कि जिला प्रशासन ने अब कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग जांच के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ दिया है।
 
 गुरुग्राम में बिगड़ा बेटियों का संतुलन! घटते लिंगानुपात पर प्रशासन सख्त, अवैध भ्रूण जांच करने वालों पर कसा शिकंजा
 गुरुग्राम : हरियाणा के गुरुग्राम जिले में लगातार गिरते लिंगानुपात ने प्रशासन की चिंता को बेहद गंभीर बना दिया है। बेटियों की घटती संख्या अब सिर्फ आंकड़ों का मामला नहीं रह गई, बल्कि इसे सामाजिक संतुलन और महिला सुरक्षा से जुड़ा बड़ा संकट माना जा रहा है। यही वजह है कि जिला प्रशासन ने अब कन्या भ्रूण हत्या और अवैध लिंग जांच के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ दिया है।

गुरुग्राम के उपायुक्त उत्तम सिंह ने जिला स्तरीय स्थायी समिति की बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत निगरानी को और मजबूत किया जाए तथा अवैध भ्रूण लिंग जांच करने वाले केंद्रों और नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि बेटी बचाने की लड़ाई केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सामने आए आंकड़ों ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता 

बैठक में पेश किए गए आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी। समीक्षा के दौरान सामने आया कि वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में गुरुग्राम का जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth) घटकर केवल 862 लड़कियां प्रति 1000 लड़कों पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 901 था। यानी एक साल के भीतर बेटियों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जो आने वाले समय के लिए गंभीर संकेत माने जा रहे हैं।

डीसी उत्तम सिंह ने कहा कि जिन गांवों और क्षेत्रों में लिंगानुपात लगातार खराब मिल रहा है, वहां विशेष अभियान चलाए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जाए। इसके लिए रैलियां, नुक्कड़ सभाएं, पोस्टर अभियान, दीवार लेखन और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि लोगों की मानसिकता में बदलाव लाया जा सके।

समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और समानता की भावना 

उन्होंने कहा कि आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बेटियों को बोझ समझने की मानसिकता बनी हुई है, जिसे खत्म करना बेहद जरूरी है। प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और समानता की भावना पैदा करना भी है। बैठक में पीसी-पीएनडीटी एक्ट के साथ-साथ मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) एक्ट के तहत हो रही कार्रवाई की भी समीक्षा की गई।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. लोकवीर सिंह ने बताया कि जिले में पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत कुल 395 केंद्र पंजीकृत हैं, जिनमें से 311 केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है। नियमों के उल्लंघन के मामलों में वर्ष 2025 में तीन और 2026 में अब तक दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा अनियमितताओं के कारण तीन केंद्रों का पंजीकरण रद्द किया गया है, जबकि पांच अल्ट्रासाउंड मशीनों को सील कर दिया गया है। सीएमओ ने बताया कि जिले में 333 पंजीकृत एमटीपी सेंटर हैं, जिनमें से 217 का निरीक्षण किया जा चुका है। वहीं असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) के तहत 59 केंद्र पंजीकृत और संचालित पाए गए, जबकि 48 अवैध केंद्रों को बंद कराया गया है।

महिलाओं और गर्भवती माताओं को जागरूक बनाने के लिए सहेली पहल

महिलाओं और गर्भवती माताओं को जागरूक करने के लिए प्रशासन ‘सहेली’ पहल भी चला रहा है। इस योजना के तहत एक से अधिक बेटियों वाली गर्भवती महिलाओं को आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए जोड़ा जा रहा है। फिलहाल 1230 महिलाओं को इस नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है, ताकि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, काउंसलिंग और सामाजिक सहयोग मिल सके।

अवैध लिंग जांच करने वालों के खिलाफ छापेमारी

प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में निगरानी और सख्त की जाएगी। अवैध लिंग जांच करने वालों के खिलाफ लगातार छापेमारी होगी और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही समाज में बेटियों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर बड़े स्तर पर जनजागरण अभियान भी चलाया जाएगा।