विश्व में शांति तभी संभव, जब हम स्वयं शांत होंगे: ऊर्जा मंत्री अनिल विज

 
 विश्व में शांति तभी संभव, जब हम स्वयं शांत होंगे: ऊर्जा मंत्री अनिल विज


अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण ही शांति प्राप्त करने का सर्वोत्तम मार्ग: अनिल विज

आज विश्व को शांति की सबसे अधिक आवश्यकता, जैन धर्म सदैव शांति का प्रतीक रहा है: विज


अंबाला छावनी में विश्व शांति महायज्ञ में शामिल हुए अनिल विज, मुनि श्री निशचिंतसागर महाराज को नमन



चण्डीगढ, 11 अक्तूबर - हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने कहा कि संसार में तब शांति होगी जब देशों में शांति होगी, देशों में तब शांति होगी जब प्रदेशों में शांति होगी, प्रदेशों में तब शांति होगी जब जिलों में शांति होगी, जिलों में तब शांति होगी जब शहरों में शांति होगी और शहरों में तब शांति होगी अगर हम शांत होंगे।

श्री विज आज प्रातः अम्बाला छावनी के जैन गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में श्री दिगम्बर जैन सभा द्वारा आयोजित विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ में मौजूद श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्हांेने कहा कि “मैं धन्य हो गया कि मुनि श्री निशचिंतसागर महाराज मेरे शहर, मेरी जन्मभूमि पर चातुर्माह के लिए पधारे और आज यहां विश्व शांति के लिए महायज्ञ किया गया है जिसके लिए उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन”। उन्होंने कहा महायज्ञ करने से बड़ा पैगाम आज के युग में कोई दूसरा हो नहीं सकता। अम्बाला छावनी का जनप्रतिनिधि होने के नाते वह सभी तरफ से मुनि श्री निशचिंतसागर महाराज को नमन करते हैं।


ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि जैन धर्म अपने नियमों अपनी सर्व शिक्षाओं के कारण हमेशा शांति का प्रतीक माना जाता है। यह समाज कई तरह के तत्वों से मिलकर बनता है और हर तत्व का अपना-अपना योगदान है। जैन समाज जैसे व्यक्तियों की सोच ज्यादा होती है वहां अशांति फैलाने वाले तत्वों पर भी असर डालते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक फूल को तोड़ने से जो ऊर्जा उत्पन्न होती है वह आम व्यक्ति तो क्या सदूर तारे को भी प्रभावित करती है, इसलिए जो कुछ भी हम करते है उसका असर इस सारे समाज पर पड़ता है। उन्होंने कहा यदि किसी मोहल्ले में रोज मार-पिटाई होती है तो उसका असर सारे शहर में रहता है, यदि हम शांति महायज्ञ करते है तो उसकी ऊर्जा, उसकी किरणे सदूर तारे तक पहुंचती है। आज विश्व को शांति की ज्यादा आवश्यकता है। यदि हम संसार के पटल को देखे तो पिछले कुछ सालों से कहीं न कहीं युद्ध हो रहा है। यह भी निष्कर्ष आ रहा है कि शायद विश्वयुद्ध भी हो सकता है, जिससे दुनिया चंतित है, मगर आपका प्रयास शांति का है।


*अपनी इच्छाओं पर हमें नियंत्रण करना चाहिए, शांति प्राप्त करने का यह सर्वाेत्तम नियम - ऊर्जा मंत्री अनिल विज*


उन्होंने कहा कि अशांति क्यों होती है, प्रभु ने मनुष्य को ऐसा नहीं बनाया, मगर जब इच्छाएं साधनों से बढ़ जाती है अशांति तब होती है। इसलिए इसका एक ही नियम है कि अपनी इच्छाओं पर हमें नियंत्रण करना चाहिए। जो ईश्वर ने दिया है उसका आभार मानकर उसको स्वीकार करना चाहिए। ईश्वर के दरबार में अन्याय नहीं हो सकता, उनसे बेहतर कौन जानता होगा कि किस व्यक्ति को क्या चाहिए, मगर जिसने संसार बनाया है, जिसने मनुष्य को बनाया उसने हर व्यक्ति के लिए तय किया है, अगर हम उतने में ही संतुष्ट रहते है तो शांति रहती है, अगर हम कुछ और प्राप्त करना चाहते है तो अशांति होती है। मंत्री अनिल विज ने उदाहरण देकर बताया कि किसी के पास साइकिल थी वो चाहता है कि स्कूटर मिले तो आनंद आ जाए, स्कूटर मिला तो सोचा कार मिल जाए तो आनंद आ जाए, कार मिली तो सोचा कि हवाई जहाज मिल जाए तो आनंद आ जाए, यानि जीवन को जो कुछ चाह रहा है वह आनंद के लिए, मगर आनंद बाहर नहीं हमारे अंदर है।


*जैन सभा के पदाधिकारियों ने ऊर्जा मंत्री अनिल विज का स्वागत किया*


इससे पहले, ऊर्जा मंत्री अनिल विज के स्कूल परिसर में पहुंचने पर श्री दिगम्बर जैन सभा के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। मंत्री विज ने मुनि श्री निशचिंतसागर महाराज जी को नमन करते हुए आशीर्वाद लिया। सभा की ओर से मंत्री अनिल विज को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर जैन सभा के प्रधान राजेश जैन के अलावा पूर्व प्रधान एडवोकेट वीके जैन, डा. राजीव जैन, विनीत जैन, विजय जैन, अतुल जैन, ललित जैन, अनिल जैन, सुनील जैन, रमन जैन के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।