नायब सिंह सैनी की मेजर भूपिंदर ढिल्लों से भेंट पर बढ़ी सियासी चर्चा
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की एक हालिया मुलाकात ने पंजाब और हरियाणा की राजनीति में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री सैनी ने मंगलवार को चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-16 में रिटायर्ड मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों के आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के परिवार के करीबी रिश्तेदार बताए जाते हैं। यह मुलाकात करीब दो घंटे तक चली, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में इसे लेकर कई तरह की अटकलें शुरू हो गईं। हालांकि, मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात पूरी तरह व्यक्तिगत थी। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी रीढ़ की सर्जरी हुई थी और मुख्यमंत्री सैनी उनका हालचाल जानने के लिए उनसे मिलने आए थे।
क्या है मुलाकात का राजनीतिक महत्व?
भले ही इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे हल्के में नहीं ले रहे हैं। वजह यह है कि यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) लगातार यह संकेत दे रही है कि वह आने वाले विधानसभा चुनावों में अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। पंजाब और हरियाणा की राजनीति में बादल परिवार का लंबे समय से प्रभाव रहा है, खासकर शिरोमणि अकाली दल (SAD) के जरिए। ऐसे में भाजपा और बादल परिवार से जुड़े करीबी लोगों के बीच किसी भी तरह की मुलाकात को रणनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात के दौरान किसी औपचारिक राजनीतिक एजेंडे की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन करीब दो घंटे की बातचीत ने अटकलों को हवा जरूर दी है। यह भी माना जा रहा है कि क्षेत्रीय राजनीति, आगामी चुनावी रणनीति और पुराने राजनीतिक रिश्तों पर सामान्य चर्चा हुई होगी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनावी मौसम से पहले इस तरह की मुलाकातें अक्सर संदेश देने का काम करती हैं।
भाजपा की रणनीति पर नजर
भाजपा के अंदरूनी सूत्र पहले ही संकेत दे चुके हैं कि पार्टी अब राज्यों में संगठन को मजबूत करते हुए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। ऐसे में सैनी की यह मुलाकात राजनीतिक समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर रही है। हालांकि अभी तक न तो मुख्यमंत्री कार्यालय और न ही भाजपा की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक राजनीतिक बयान जारी किया गया है।
निष्कर्ष
फिलहाल इस मुलाकात को एक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन हरियाणा और पंजाब की सियासत में इसका असर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्तिगत मुलाकात थी या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा है।
