हरियाणा में "स्मार्ट एग्रीकल्चर" योजना के तहत प्राकृतिक खेती की होगी शुरुआत

कुरुक्षेत्र:  रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद्गीता सदन में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा एवं क्लस्टर गठन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों के हित में बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2,000 एकड़ के क्लस्टर में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से "स्मार्ट एग्रीकल्चर" योजना के तहत प्राकृतिक खेती शुरू की जाएगी। यदि इस योजना में किसानों को किसी भी तरह का नुकसान होता है तो उसकी भरपाई सरकार की ओर से की जाएगी।
 
हरियाणा में "स्मार्ट एग्रीकल्चर" योजना के तहत प्राकृतिक खेती की होगी शुरुआत

 कुरुक्षेत्र:  रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवद्गीता सदन में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा एवं क्लस्टर गठन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों के हित में बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2,000 एकड़ के क्लस्टर में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से "स्मार्ट एग्रीकल्चर" योजना के तहत प्राकृतिक खेती शुरू की जाएगी। यदि इस योजना में किसानों को किसी भी तरह का नुकसान होता है तो उसकी भरपाई सरकार की ओर से की जाएगी।

मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि  प्राकृतिक खेती हमारी प्राचीन कृषि परंपरा का हिस्सा रही है। मां गंगा सहित अन्य पावन नदियों के जल से सिंचित भूमि पर उपजे अन्न ने भारत को समृद्ध बनाया और देश को सोने की चिड़िया के रूप में पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण ही सतत विकास की कुंजी है और प्राकृतिक खेती इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि साल 2022 में शुरू की गई प्राकृतिक खेती योजना के तहत अब तक लगभग दो लाख किसानों ने तीन लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण कराया है। इनमें से 23,930 किसानों का 44,077 एकड़ क्षेत्र के लिए सत्यापन किया जा चुका है। वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 20,727 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की गई है।

इस अवसर पर  गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, चीफ व्हीप रामकुमार कश्यप, पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा तथा भाजपा जिलाध्यक्ष तिजेंद्र सिंह गोल्डी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री सैनी ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की सराहना करते हुए कहा कि वे प्राकृतिक खेती के सबसे बड़े प्रेरक हैं। उनके प्रयासों से गुरुकुल कुरुक्षेत्र में 180 एकड़ भूमि पर विकसित प्राकृतिक कृषि फार्म किसानों के लिए एक आदर्श मॉडल बन चुका है, जहां बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के केवल जीवामृत, घन जीवामृत और बीजामृत के माध्यम से खेती की जा रही है।

किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए 

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देने के लिए कुरुक्षेत्र के गुरुकुल, जींद के हमेटी, सिरसा के मंगियाना और करनाल के घरौंडा में विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। गुरुकुल कुरुक्षेत्र में राज्य सलाहकार की नियुक्ति भी की गई है। अब तक 12,188 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें किसान, महिलाएं और सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 6,234 सरपंचों को ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया गया है।

देसी गाय खरीदने  पर 30 हजार रुपये की सब्सिडी 

मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि साल 2025 से प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को देसी गाय खरीदने पर 30 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा कच्चे माल के भंडारण और प्रसंस्करण के लिए चार ड्रम खरीदने पर प्रत्येक किसान को 3 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। योजना के तहत अब तक 2,500 किसानों को 75 लाख रुपये तथा 1,171 किसानों को देसी गाय खरीदने के लिए 2.97 करोड़ रुपये की अनुदान राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई नीति तैयार 

मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि कृषि विभाग की लगभग 800 एकड़ भूमि केवल उन किसानों को पट्टे पर दी जाएगी जो कम से कम 10 सालों तक प्राकृतिक एवं जैविक खेती करेंगे। पंचायत भूमि पर भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई नीति तैयार की जाएगी। साथ ही प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए मंडियों में विशेष स्थान उपलब्ध कराया जाएगा तथा परीक्षण प्रयोगशालाएं और प्रमाणीकरण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मोरनी ब्लॉक को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के मॉडल ब्लॉक के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रदेश सरकार किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है और हरियाणा देश का ऐसा राज्य है जहां सभी 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जा रही है।